Home मुख्य मैथिल कवि मधुप की पुण्यतिथि पर आयोजित स्मृति पर्व समारोह में गायब रहे कथित मैथिल पुत्र! Voice of Darbhanga
मुख्य - December 17, 2017

मैथिल कवि मधुप की पुण्यतिथि पर आयोजित स्मृति पर्व समारोह में गायब रहे कथित मैथिल पुत्र! Voice of Darbhanga

दरभंगा: मैथिली कवि चूड़ामणि काशी कांत मिश्र ‘मधुप’ की 30वीं पुण्यतिथि के अवसर उनके समाधि स्थल पर स्मृति पर्व समारोह का आयोजन किया गया l प्रख्यात साहित्यकार और गीतकार शंभू नाथ मिश्र की अध्यक्षता मे आयोजित समारोह का उद्घाटन  करते हुए शशिबोध मिश्र ने मधुप जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व की विस्तार से चर्चा  करते कहा कि मधुप की रचनायें मिथिला की समृद्ध लोक संस्कृति को सहेजने मे कारगर साबित हो रही हैं l इस अवसर मधुप की अप्रकाशित रचनाओं क संकलन ‘विनयांजलि’ का लोकर्पण भी किया गया l  साथ ही राजा बाबू एवं विष्णु देव झा ‘विकल’ को मधुप सम्मान से सम्मानित किया गया l मैथिली हास्यव्यंग्य के सशक्त हस्ताक्षर डा जयप्रकाश चौधरी जनक के कुशल संचालन मे आयोजित समारोह में मुख्य अतिथी के रूप मे सुरेन्द्र झा विरजमाण थे l

समारोह में  उमानाथ झा , विरेन्द्र झा , सुमन सौरभ एवं दीपक कुमार झा ने  माधुप संगीत व विन्यांजली की भावपूर्ण प्रस्तुति दी l माधुप जी के आत्मज द्वय मणि कांत मिश्र एवं देव कांत मिश्र के संयोजन में आयोजित कार्यक्रम में विष्णु देव झा ‘विकल’ की पुस्तक ‘ भाव पुष्प’ एवं ‘दक्षेश्वर महादेव’ का विमोचन भी हुआ l  कार्यक्रम के अंतिम चरण मे राम सेवक ठाकुर के संचालन में विराट कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।

मधुप स्मृति पर्व समारोह में मिथिला मैथिलि के नाम पर बड़े बड़े प्रायोजकों के बल पर धन अर्जित करने वाले नेता रूपी स्वयंभू मैथिल पुत्र आदि का इस समारोह में कहीं उपस्थित न होना भी चर्चा का विषय रहा। लोगो का कहना था कि जहाँ कार्यक्रम के नाम पर बड़े बड़े प्रायोजक मिलते हैं, वहीँ ऐसे ऐसे कथित मैथिल पुत्र अब नजर आते हैं। मिथिला के वास्तविक जीवंत स्तम्भों जिनकी स्मृति सहेजने की जरूरत है, इनमे प्रायोजकों का पैसा नही मिलता। अतः ऐसे आयोजनों से मैथिल पुत्र से विशुद्ध राजनीतिज्ञ बन चुके लोगो को आर्थिक या राजनितिक लाभ नही होने वाला, तो उनकी रूचि भी नही होती।

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