Home मुख्य प्लास्टिक मानव समाज का सबसे बड़ा शत्रु बनकर उभर रहा: प्रो0 अचल। Voice of Darbhanga
मुख्य - December 18, 2017

प्लास्टिक मानव समाज का सबसे बड़ा शत्रु बनकर उभर रहा: प्रो0 अचल। Voice of Darbhanga

दरभंगा: आधुनिक समाज में प्लास्टिक मानव शत्रु के रूप में उभर रहा हैं। समाज में फैले आतंकवाद से तो छुटकारा पाया जा सकता है पर प्लास्टिक से छुटकारा पाना अत्यंत कठिन है। प्लास्टिक हमारे दैनिक उपयोग की वस्तु बन गया है। गृहोपयोगी वस्तुओं से लेकर कृषि, चिकित्सा, भवन निर्माण, विज्ञान सेना, शिक्षा, मनोरंजन, अंतरिक्ष, अंतरिक्ष कार्यक्रमों और सूचना प्रोद्यौगिकी आदि में प्लास्टिक का उपयोग हो रहा है। स्वाभाविक है कि प्लास्टिक व पॉलीथिन को एकाएक बंद नहीं किया जा सकता है। उक्त बातें डॉ. प्रभात दास फाउण्डेशन एवं सीएम साइंस कॉलेज की एनएसएस इकाई के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ”पॉलीथिन: एक पर्यावरणीय खतरा” विषयक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए बतौर मुख्य अतिथि एजीबीजे (एसोसिएशन ऑफ जोगरफर बिहार-झारखंड) के अध्यक्ष प्रो. टून टून झा ‘अचल’ ने कही। उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्रों में समाज के शिक्षित वर्ग द्वारा भी इसे लगभग 80 प्रतिशत उपयोग में लाया जा रहा है। बाद में उसमें खाद्य सामग्री संबंधित कचड़ा भरकर सड़कों पर फेंक दिए जाते हैं। परिणाम यह होता है कि खाद्य सामग्री सहित पशु प्लास्टिक के थैले को भी खा लेते है और धीरे-धीरे मृत्यु के आगोश में समा जाते है। प्लास्टिक खेतों में दबकर उसकी उर्वरा शक्ति क्षीण करता है। समुद्र में फेंके जाने वाले लाखों टन पॉलीथिन समुद्री वनस्पतियों व जीवजन्तुओं आदि के लिए खतरा साबित हो रहा है। डॉ. अशोक झा ने कहा कि प्लास्टिक या पॉलीथिन एक नष्ट न होने वाला पदार्थ है। इसे केवल जलाकर ही एक सीमा तक नष्ट किया जा सकता है। किंतु जलने से भी गंभीर विकिरण होता है।अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अरविंद कुमार झा ने कहा कि प्लास्टिक, पॉलीथिन, डिस्पोजल ग्लास, प्लेट आदि धरती में दबने से हजारों साल तक नष्ट नहीं होते और उसी स्थिति में पड़े रहते है। जिससे भविष्य में जलीय संकट का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि पॉलीथिन में गर्म या खट्टी वस्तुएं रखी जाए तो तुरंत ही रसायनिक प्रक्रिया प्रारंभ हो जाती हैं, जिसके कारण खाद्य वस्तुएं न खाने योग्य हो जाती है। एनएसएस के प्रोग्राम ऑफिसर डॉ. सत्येन्द्र कुमार झा ने कहा कि पॉलीथिन शहर की गंदगी का प्रमुख स्त्रोत होने के साथ मूक प्राणियों के लिए भी घातक है। इसके अलावा महाविद्यालय के छात्र अंकित कुमार, श्वेता कुमारी, विशाल कुमार, अमन कुमार ने भी संगोष्ठी में अपने विचार रखे। साथ ही प्रधानाचार्य ने संगोष्ठी में छात्र-छात्राओं को शपथ दिलायी कि वे पॉलीथिन का प्रयोग कम से कम करें। कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रभात दास फाउंडेशन के सचिव मुकेश कुमार झा ने किया। जबकि धन्यवाद ज्ञापन आक्यूएसी सेल के प्रवीण कुमार झा ने किया। मौके पर फाउण्डेशन के अनिल कुमार सिंह, मनीष आनंद, नवीन कुमार, मोहन साह, राजीव कुमार, नीरज चौधरी आदि मौजूद थे।

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