Home मुख्य नगर निगम को कचरा प्रबंधन के जरिये मिलेगा दोहरा लाभ। Voice of Darbhanga
मुख्य - December 25, 2017

नगर निगम को कचरा प्रबंधन के जरिये मिलेगा दोहरा लाभ। Voice of Darbhanga

दरभंगा : शहरवासियों को नगर निगम जल्द ही दो डस्टबीन उपलब्ध करायेगा. इसमें एक सूखा  कचरा तथा दूसरा गीला कचरा रखा जायेगा. कचरा अपशिष्ट प्रबंधन के नजरिये से  यह पहल की जा रही है. इस कंपोस्ट के जरिये जैविक खाद बनाये जाने के  प्रक्रिया जल्द ही यहां होते लोग देखेंगे. इसे लेकर स्थानीय स्तर पर जन  प्रतिनिधि व अधिकारी संवेदनशील है. बीते 18 दिसंबर को हुयी स्थायी समिति की  बैठक में सदस्यों ने इस पर कार्य जल्द शुरू करने पर बल दिया था.  मुजफ्फरपुर नगर निगम के तर्ज पर यहां इसकी शुरुआत हो रही है.  गत 18 दिसम्बर को हुए स्थायी समिति की  बैठक में सदस्यों ने इस पर कार्य जल्द शुरू करने पर बल दिया था.  मुजफ्फरपुर नगर निगम के तर्ज पर यहां इसकी शुरुआत हो रही है. इसके लिये  इससे पूर्व कई पार्षद स्वयं मुजफ्फरपुर निगम जाकर कचरा कंपोस्ट होते देख  दरभंगा नगर निगम में भी शुरू करने के पक्ष में आये. कंपोस्ट के जरिये कचरे  के निस्तारण व संधारण से जहां शहर स्वच्छ व स्वस्थ रखा जा सकेगा. वहीं इस  प्रक्रिया से जहां-तहां कचरे का ढेर लगने से होने वाले समस्या पर काफी हद  तक लगाम लग सकेगा. वहीं लोगों को सुविधा के साथ-साथ नगर निगम को कम व्यय  में अधिक आय भी होगा.

सूखा  व गीला कचरा रखने के लिये दो अलग-अलग डस्टबिन का क्रय किया जाना है. एक  डस्टबिन का सरकारी दर करीब दो सौ रुपये है. कुल डस्टबिन की कीमत दो लाख 21  हजार 60 रुपये खर्च आयेगी. इसके अलावा उच्च क्षमता वाले कंपोस्ट मशीन की  खरीद करनी होगी. विभागीय निर्देशानुसार डस्टबिन या अन्य जरूरी सामान जेम  पोर्टल से ही क्रय किया जाना है.

सूखा व गीला अलग-अलग कचरा इकट्ठा करने को लेकर प्रत्येक  घर में दो-दो डस्टबिन दी जानी है. निगम के अंतर्गत कुल 55 हजार 265 हाउस  होल्ड हैं. दो-दो डस्टबिन हर घर मिलाकर कुल एक लाख 10 हजार 530 डस्टबिन की  आवश्यकता होगी. इसके साथ ही कंपोस्ट के जरिये खाद बनाये जाने के लिये स्थल  व क्षमता अनुसार मशीन की भी आवश्यकता है. वर्त्तमान में नगर से रोजाना 160  मीट्रिक टन कचरे का उठाव किया जाता है.

गुजरात  की एजेंसी वर्तमान में मुजफ्फरपुर निगम के आठ वार्डों से सूखा व गीला  कचरा दो अलग-अलग डस्टबिन में इकट्ठा कर निगम के बने शेड में जैविक खाद  बनाया जाता है. कचरे के निष्पादन में जहां कम लागत लगता है, वहीं खाद की  बिक्री से निगम को आय भी हो रही है. गीला कचरे को कंपोस्ट कर जैविक खाद  बनाया जा सकता है. सूखा कचरा से पन्नी व प्लास्टिक की बोतलें अलग कर बिक्री  की जा सकती है. इससे दिनभर कचरे के उठाव व डंपिंग ग्राउंड तक कचरा डंप  करने के लिये वाहन में आने वाले खर्च में भी कमी आने से फायदा मिलेगा.

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