
कड़ाके की ठंढ के वाबजूद उत्साह और उमंग के बीच दरभंगा में मना नववर्ष। Voice of Darbhanga

दरभंगा : नववर्ष का उत्साह लोगों के सिर चढ़कर बोल रहा था. खासकर युवाओं और बच्चों में तो भारी उत्साह देखा गया. जगह-जगह पिकनिक मनाते लोग देखे गये. शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में नववर्ष मनाने की धूम रही. दरभंगा में तो शहर के सभी रास्ते मानो ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय परिसर की ओर मुड़ गया था. विशाल परिसर रहने के बावजूद तील रखने की जगह नहीं थी. वैसे ठंढ़ चरमसीमा को पार कर चुकी है. दिन भर धूप का दर्शन नहीं हुआ. फिर भी उत्साह में कमी नहीं देखी गई. छोटे-छोटे बच्चों ने भी नववर्ष पर घर में केक काटा. केक काटकर नववर्ष का मजा उठाया. शहर के अलावे ग्रामीण क्षेत्रों में भी नववर्ष की धूम रही. गांवों में सभी तबके के लोगों ने नववर्ष उत्साह से मनाया. यहां तक की मजदूर वर्ग भी आज काम पर नहीं जाकर नववर्ष के जश्न में शामिल रहा. ग्रामीण क्षेत्रों में शराबबंदी का असर रहा. पर ताड़ी खुलेआम बिके. ग्रामीण क्षेत्रों में भी मिठाई, हलवा व खीर का उपयोग शाकाहारी व्यक्तियों ने किया. जबकि मांसाहारी व्यक्ति मछली, मुर्गा और मीट की खरीददारी की. शहरी क्षेत्र में तो मीट के दुकानों पर दोपहर एक बजे तक लोगों ने खरीददारी की. जबकि बिक्री सुबह 4 बजे से ही शुरू हो गई थी. 350 रूपये किलो बिकने वाला मीट 500 रूपये किलो बिका. इसी तरह मुर्गा, बटेर और मछलियों के भाव में काफी उछाल रहा. मिठाईयों की बिक्री भी काफी अधिक रही. आज घिबर की बिक्री भी काफी हुई. वहीं शाकाहारी लोगों ने सब्जी में कटहल, परबल अन्य दिनों की अपेक्षा दोगुनी कीमत पर खरीदी.
शराबबंदी का सबसे बड़ा असर दरभंगा शहर में देखने को मिला. शराबबंदी से पहले 4 बजे शाम के बाद शहर में निकलने वाले लोग झुमते नजर आते थे. मारपीट, गाली-गलौज आम बात थी. लेकिन यह नजारा इस बार नहीं दिखा और सभी तबके के लोग महिला-पुरूष यहां तक कि बच्चे भी शहर में घुमते दिखे.

