
खुलासा: तमाम आदेशों को धत्ता बताकर भरा जा रहा रामबाग परिसर का गरखई नहर! Voice of Darbhanga

दरभंगा। अभिषेक कुमार
शहर में भूमाफियाओं का वर्चस्व कोई नई बात नही है। शहर के जल स्रोतों को दिन दहाड़े प्रशासन के नाक के नीचे भूमाफियाओं द्वारा भरा जाता है पर तमाम शिकायतों एवं आदेशों के वाबजूद कोई ठोस कारवाई नही होती। सबसे ज्यादा मामला सदर प्रखंड अंतर्गत शहरी क्षेत्र में देखने को मिल रहा है। सदर अंचलाधिकारी राकेश कुमार के पास भी लगातार शिकायतें की गयी। बहुत दवाब पड़ने पर अंचलाधिकारी द्वारा थाना को भराई रोकने का एक पत्र लिख दिया जाता है। थाना पर जब बहुत ज्यादा दवाब पड़ता है तो जल स्रोतों को भर रहे एकाध ट्रैक्टर आदि को पकड़ा जाता है, फिर थाने से छोड़ दिया जाता है। पर कोई ठोस कारवाई नही होती है। इस पर शहर के जनप्रतिनिधि का भी मौन व्रत धारण करके रखना निश्चिय रूप से जनता के सामने मौन व्रत के कारणों मौन रूप में ही सही,परंतु प्रकट जरूर करता है। अगर जन प्रतिनिधि सशक्त विरोध की इच्छाशक्ति दिखाएं तो प्रशासन पर दवाब होना लाजिमी हो जाता है। परंतु जनप्रतिनिधि का विरोध केवल निजी कारण के पूर्ति तक हो तो भूमाफियाओं को प्रशासन को मैनेज करने में ज्यादा दिक्कत का सामना नही करना पड़ता।
अभी ताजा मामले की चर्चा करें तो रामबाग परिसर स्थित कंकाली मंदिर के पश्चिम गरखई नहर को लगातार भरा जा रहा है। इसकी शिकायतें कई स्तर पर स्थानीय लोगों द्वारा किये जाने एवं तमाम नियमो का हवाला देते हुए स्पष्ट सबूत प्रस्तुत करने के वाबजूद कारवाई नही की जा रही है भूमाफियाओं के खिलाफ और बढ़े मनोबल के साथ सुप्रीम कोर्ट, पटना हाई कोर्ट तथा बिहार सरकार के आदेशों का उलंघन होते देख भी सदर अंचलाधिकारी एवं विश्विद्यालय थाना भी इसे रोकने निरीह दिख रहे रहे हैं। रामबाग परिसर संरक्षण एवं संवर्धन ट्रस्ट के द्वारा कई स्तरों की शिकायतों एवं शिकायत के बाद जांच ने अंचल के कर्मचारी द्वारा अपने जांच रिपोर्ट में जल स्रोत को भरे जाने की पुष्टि के बाद अंततः अंचलाधिकारी द्वारा भले ही मजबूरी में ही सही, परंतु 10 दिसम्बर 2017 को विश्विद्यालय थाना को लिखित रूप में इसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अवहेलना बताते हुए रोकने का निर्देश दिया गया। फिर भी जब रोकने में विश्विद्यालय थाना ने दिलचस्पी नही दिखाई तो अंचलाधिकारी भी शांत ही दिखे क्योंकि उन्होंने थाना को पत्र लिखकर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली थी। अंततः ट्रस्ट के लोग फिर अंचलाधिकारी के निर्देश पालन नही होने की शिकायत लेकर सदर डीएसपी के पास पहुँचे। सदर डीएसपी द्वारा त्वरित कारवाई कर भराई रोकने का निर्देश थाना को दिया गया। परंतु ट्रस्ट के संचालक बताते हैं कि इतना होने पर विश्विद्यालय थाना की पुलिस अगले दिन आयी और मिट्टी भर रहे ट्रैक्टर को पकड़ कर ले गयी और थाने से फिर उसे चेतावनी आदि देकर छोड़ दिया। इस प्रकार आदेश पालन का कर्तव्य निर्वहन कर पुलिस द्वारा भी पल्ला झाड़ लिया गया। परंतु रंगे हाथ पकड़े जाने पर भी भराई करवा रहे भूमाफियाओं पर प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कारवाई नही की गयी। दिसम्बर के अंतिम सप्ताह में पुनः इस नहर को भरने में तेजी आयी तो ट्रस्ट के लोग पूर्व के आवेदन एवं आदेशों की प्रति लेकर जिलाधिकारी से मिले। इतना करने पर पुलिस पर पुनः दवाब पड़ा तो पुनः पुलिस ने गत चार जनवरी को अपने कर्तव्य निर्वहन की खानापूर्ति भराई कर रहे एक ट्रैक्टर को स्थल से पकड़ कर और थाने ले जाकर छोड़कर कर ली।
यहां बिहार सरकार के स्पष्ट आदेश का अध्यन यदि आम पाठक भी कर लें तो क़ानूनी प्रावधानों को आसानी से समझ सकते हैं कि ऐसे कृत करने वालों पर कितने सख्त क़ानूनी कारवाई का प्रावधान है, परंतु शायद यहां के प्रशसनिक एवं पुलिस पदाधिकारी केलिए इसे समझना मुश्किल हो रहा है या जानबूझ कर अवहेलना किया जा रहा है, इसका अंदाजा स्वतः लग जाता है।
बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के पत्रांक-6 / खा0म0पटना (नीति)-03/2016 655 (6) रा0 में प्रधान सचिव व्यास जी द्वारा दिनांक 16/06/2016 को बिहार के सभी प्रमंडलीय आयुक्त एवं सभी जिला पदाधिकारियों को पत्र लिखा गया है। इस पत्र के पैरा 4 में विभाग द्वारा “अभियान जल निकाय संरक्षण” प्रारम्भ कर तत्काल प्रभाव से जिलास्तर पर निम्न कारवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया:
(i) प्रथम चरण में अभियान चलाकर सभी सार्वजनिल जल स्रोतों को चिन्हित किया जाय तथा अंचलवार इसकी सूची का संधारण प्रपत्र – I में किया जाय।
(i) प्रपत्र – I को जिले के वेबसाइट पर अपलोड किया जाय तथा इसपर आम जनता से भी जानकारी माँगी जाय ताकि जो जल स्रोत सूचि में शामिल नही हों उन्हें भी सूची में शामिल कर प्रपत्र I में अद्यतन करने में मदद मिल सके।
(iii) संभावना हो सकती है कि उपरोक्तानुसार सूचीबद्ध जल श्रोतों की पूरी अथवा कुछ हिस्से की जमाबन्दी कायम करा ली गयी हो। अतएव अभियान चलाकर जमाबन्दियों को विहित प्रक्रियानुसार रद्द करने की कारवाई सुनिश्चत की जाय। रद्द जमाबन्दियों की सूचना संलग्न विहित प्रपत्र II में संधारित कर जिले की वेबसाइट पर अपलोड किया जाय।
(iv) अभियान चलाकर यह ज्ञात किया जाय कि प्रपत्र-I में संधारित जल स्रोतों का अतिक्रमण हुआ है या नही। जल निकायों के अतिक्रमण को चिन्हित करने में GPS की मदद ली जा सकती है। यदि अतिक्रमण हुआ हो तो नापी कर अतिक्रमित भूमि का पता लगाया जाय एवं तदनुसार बिहार लोक भूमि अतिक्रमण अधिनियम के आलोक में अतिक्रमणवाद चलाया जाय। अतिक्रमणवाद प्रारम्भ करने से लेकर उसके निष्पादन तक की विभिन्न कार्रवाइयों को प्रपत्र – III में दर्ज किया जाय ताकि जिलास्तर पर इसका अनुश्रवण किया जा सके।
(v) अतिक्रमणवाद में निर्णय के उपरान्त अतिक्रमण हटाने की कारवाई की जाय तथा उक्त अधिनियम की धारा 6 (2) में निहित प्रावधानों के आलोक में सम्बंधित अतिक्रमणकारी के विरुद्ध मुकदमा भी दर्ज किया जाय तथा हटाये गए अतिक्रमण की सूचि को सम्बंधित थाना में सनहा के रूप में दर्ज कराया जाय ताकि दुबारा अतिक्रमण नही हो। इसे थानाध्यक्ष द्वारा सुनिश्चित कराया जा सके। इस प्रकार हटाये गये अतिक्रमण के मामलों का संधारण प्रपत्र -III में ही किया जाय।
उपरोक्त बिन्दुओ के साथ पत्र के पैरा 5 में यह भी स्पष्ट निर्देश है कि किसी भी स्थिति में ऐसी भूमि का अंतर्विभागीय हस्तांतरण नही होगा, अपितु सरकार की विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत सम्बंधित जल निकायों का जीर्णोद्धार किया जायेगा अथवा गहरीकरण किया जाएगा ताकि जल संरक्षण हो सके। अतएव किसी भी स्थिति में जल निकायों का स्वरुप बदलने पर उनका अंतर्विभागीय हस्तांतरण अथवा बन्दोबस्ती (लीज सहित) नही किया जाय तथा सरकार की विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत उसका जीर्णोद्धार एवं गहरीकरण किया जाय।
उपरोक्त उधृत पत्र के स्पष्ट निर्देशों के अलावा इसी संदर्भ में माननीय उच्च न्यायालय पटना में आदेश की कॉपी भी प्रशासन को को दिया गया। इस संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट का भी स्पष्ट आदेश है जिसका जिक्र सदर अंचलाधिकारी ने थानाध्यक्ष को लिखे पत्र ने स्वयं भी किया है।
उपरोक्त नियमो एवं आदेशों के सहारे ट्रस्ट के संचालकों ने अनुमण्डल, जिला एवं प्रमण्डल कार्यालय में भी आवेदन दे कर विभिन्न आदेश पारित कराये। पर सदर अंचलाधिकारी और विश्विद्यालय थाना द्वारा कर्तव्य निर्वहन की खानापूर्ति कर लेने और जनप्रतिनिधि की चुप्पी रहने के कारण प्रशासन पर भी नियमो के आलोक में कारवाई करवाने का कोई ख़ास दवाब नजर नही आ रहा और भूमाफियाओं द्वारा बेख़ौफ़ होकर लगातार नहर को भरे जाने का काम जारी है।
यहां उधृत कर दें कि विश्विद्यालय थाना कि अप्राथमिकी सं0 12/17 के अंतर्गत अनुसंधानक द्वारा 16-04-2017 को अनुमण्डल पदाधिकारी को 144 हेतु दिये प्रतिवेदन में
भी स्पष्ट तौर पर इसे भरवाने वाले पक्ष का नाम उधृत है। फिर भी सरकार के आदेश के वाबजूद अतिक्रमणकारी पर न मुकदमा दर्ज किया गया और न ही अभी तक नहर को भरना रोका गया है। उपरोक्त कहानी को देख कर स्वतः स्पष्ट हो जाता है कि भूमाफियाओं द्वारा किस प्रकार मैनेजमेंट का खेल खेलकर पुरे गरखई नहर को भरा जा रहा है।

