
बड़ा खुलासा: मरीज ठंढ में ठिठुरते रहे और लाखों के कम्बल-गद्दे स्टोर में ही सड़ गये! Voice of Darbhanga

दरभंगा। अभिषेक कुमार
डीएमसीएच में लापरवाही और बर्बादी की खबर कोई नयी बात नही है। सरकार से लाखों करोड़ों का खर्च मरीजो की सुविधाओं के नाम पर कराया जाता है जिससे ठेकेदारों एवं अधिकारियों की अच्छी खासी कमाई हो जाती है, पर मरीजों तक सुविधा नही पहुँच पाता है और उसे जानबूझ कर बर्बाद होने के लिए छोड़ दिया जाता है। डीएमसीएच में जरूरी सामान के रखरखाव व देखभाल में किस कदर लापरवाही बरती जा रही है, इसका एक ताजा उदाहरण सामने आया है। डीएमसीएच के गैर स्टोर (डायट विभाग के रूम ) में रखे लाखों रुपये मूल्य के कंबल पानी से बर्बाद हो गए हैं। इसकी खरीदारी बरसात पूर्व की गई थी। इसका पता तब चला जब सर्जरी विभाग के एक कर्मी को कंबल देने के लिए डॉयट विभाग के इस कमरे को खोला गया। इसमें चार बंडलों में 40 कंबल, 38 गददा, चार बंडल में रखे पर्दे और चादर, बिजली के केबुल-तार समेत अन्य कई महत्वपूर्ण सामग्री रखी हुई है। बताते हैँ कि इस स्टोर में बीते बरसात में पानी समा गया था। लेकिन डीएमसीएच प्रशासन ने इसकी सुध नहीं ली। किसी ने इस स्टोर की ओर झांकने की जहमत नहीं उठायी। नतीजतन इसमें रखे कंबलव अन्य कपड़े पानी में सड़ने की स्थिति में पहुंच गए हैं। इतना ही नहीं लाखों की लागत से अन्य सामग्री अस्पताल उपाधीक्षक के जर्जर भवन में रखी हुई है। उस रूम को अभी तक खोला नहीं गया है। इसमें भी अधिक मात्रा में सामग्री नष्ट होने की आशंका है। जानकार सूत्र बताते हैं कि इस स्टोर की सामग्री पानी में पड़ी रही लेकिन जलजमाव समाप्त होने के बाद भी डीएमसीएच प्रशासन ने इसमें रखी सामग्री की सुध नहीं ली। समय
रहते इस पर ध्यान दिया जाता तो सामग्री बर्बाद नहीं होती। हालांकि छानबीन या जांच पड़ताल में और अधिक सामग्री बर्बाद होने की संभावन व्यक्त की जा रही है। इधर ठंड में मरीजों को कंबल नसीब नहीं हो रहा है। मर जों की बेड पर चादर नहीं हैं। गददा बिना मरीज ठिठुर रहे हैं और उधर लाखों के कम्बल, गद्दे एवं चादर आदि सड़ गये।
अब सवाल यह उठता है कि क्या इसके लिए अस्पताल प्रशासन दोषी नही है! और अगर अस्पताल प्रशासन दोषी है तो फिर इसके लिए अस्पताल अधीक्षक संतोष मिश्रा दोषी कैसे नही हैं! परंतु स्पष्ट है कि बिहार सरकार के सत्तारूढ़ दल के एक बड़े नेता के रिश्तेदार होने के कारण आजतक हुई लगातार लापरवाहीयों पर कोई कारवाई अस्पताल अधीक्षक पर नही हुई है। जगजाहिर है कि अधीक्षक संतोष मिश्रा नितीश कुमार के करीबी नेताओं में से एक मिथिलांचल के एक कद्दावर नेता का रिश्तेदार खुद को बता कर अपना रौआब बना कर रखे हुए हैं और यही कारण है कि शायद खुद को घोटाला या लापरवाही की खुली छूट मिली हुई मानते हैं।

