
कुव्यवस्थाओं का अड्डा बन चुके डीएमसीएच पर बकाया है साढ़े पाँच करोड़ का बिजली बिल। Voice of Darbhanga

दरभंगा : बिजली विभाग का सरकारी महकमों पर बकाया रखने का चलन-सा हो गया है. सरकारी विभागों पर लगातार बकाया रहने से विभाग को राजस्व की हानि हो रही है. अपने कुव्यवस्थाओं केलिए लगातार चर्चा में रहने वाले डीएमसीएच बिना भुगतान किये ही विगत कई सालों से बिजली उपभोग कर रहा है. बिजली विभाग द्वारा निर्धारित अवधि में बिल दिये जाने के बाद भी बकाया भुगतान को लेकर अस्पताल प्रशासन तवज्जो नहीं देता. संबंधित विभाग से बिजली विभाग के अधिकारी मनुहार करते आ रहे हैं, बावजूद भुगतान नहीं होने से इन विभागों से वसूली करना सिरदर्द हो गया है.
आकस्मिक सेवा का हवाला देकर भुगतान से बचने का प्रयास किया जाता है. मुख्यालय स्तर से बिजली खरीद कर दिये जाने का हवाला देकर शत-प्रतिशत वसूली का टार्गेट देकर दबाव बनाया जाता है, लेकिन इस तरह के विभागों से वसूली पर कोई कार्रवाई नहीं होने से इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं पड़ता है. एक माह बकाया रखने की स्थिति में वसूली को लेकर लाइन काटने में विभाग तनिक भी देरी नहीं करता, लेकिन इस तरह के हठी व लापरवाह सरकारी महकमों की ओर से बिना भुगतान के ही अनवरत बिजली का उपभोग किया जाता है. पर विभाग इन पर सीधे कार्रवाई भी नहीं करता.
डीएमसीएच में बिजली उपभोग के लिये पांच कनेक्शन लिया गया है. विभाग द्वारा लिये गये कनेक्शनों पर बीते पांच सालों में पांच करोड़ 55 लाख 94 हजार 959 रुपये का बिजली उपभोग किया, लेकिन भुगतान न के बराबर है. फंड की कमी व आकास्मिक सेवा की आड़ में कर्मी अपने क्वाटरों में हीटर व अन्य उपकरण का उपयोग बिजली से करते आ रहे हैं.
डीएमसीएच परिसर में मेडिकल कॉलेज को बिजली विभाग के बकाया भुगतान के लिए फंड की कमी नहीं हो रही है. प्रत्येक माह निर्धारित अवधि में लिये गये कनेक्शन से बिजली खपत का भुगतान करता आ रहा है. 10-12 कनेक्शनों का प्रति माह एवरेज बिल का भुगतान करीब 12 लाख रुपये जमा कर रहा है. वहीं डीएमसीएच अपने पांच कनेक्शनों के प्रति माह एवरेज बिल करीब 22 लाख रुपये की बिजली खपत की राशि का बकाया भुगतान में दिलचस्पी नहीं लेने से बिजली विभाग को राजस्व का चूना लग रहा है.
डीएमसीएच बिजली विभाग से पांच कनेक्शन ले रखा है. इसमें से तीन कनेक्शनों का भुगतान बिजली विभाग के अधिकारियों के जूते घिसने के बाद बीते मई 2017 में एक करोड़ 74 लाख 99 हजार 288 रुपये का भुगतान किया था. इसमें कनेक्शन अधीक्षक डीएमसीएच मनोरोग विभाग के खाता संख्या (400965060) पर जनवरी 2018 तक 36 हजार 510 रुपये, अधीक्षक डीएमसीएच सर्जन क्वार्टर पर अगस्त 2017 तक खाता संख्या (400361760) पर तीन करोड़ 58 लाख 21 हजार 507 रुपये, सर्जिकल विभाग खाता संख्या 400517619) पर जनवरी 2018 तक 36 लाख नौ हजार 646 रुपये, डीएमसीएच अधीक्षक पर जनवरी 2018 तक खाता संख्या (400161700) पर 96 लाख 55 हजार 241 रुपये एवं डीएमसीएच आइसोलेशन वार्ड पर दिसम्बर 2017 तक खाता संख्या (400361762) पर 65 लाख 33 हजार 237 रुपये का बकाया चला आ रहा है.
लगातार विभागीय लापरवाहियों के कारण उत्तर बिहार का चिकित्सा का सबसे बड़ा केंद्र दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल कुव्यवस्थाओं का अड्डा बन चुका है. वाबजूद इसके सूत्र बताते हैं कि अधीक्षक संतोष मिश्रा अपने राजनितिक रसूख के कारण कान में तेल डाल कर आराम
से सो रहे हैं. उन्हें पता है कि मधुबनी के उनके कद्दावर राजनितिक रिश्तेदार नितीश कुमार के करीबी माने जाते हैं और उनके वरदहस्त रहते अस्पताल में घपला घोटाला हो या कुव्यवस्था रहे, चाहे आग लग जाए या मरीज मर जाए, कोई उनका कुछ नही बिगाड़ सकता। अधीक्षक संतोष मिश्रा केलिए अपने कद्दावर राजनितिक रिश्तेदार के रसूख पर राज करते देख यह गीत सटीक बैठता है:- जब सैंया भयो कोतवाल तो फिर डर काहे का…

