
तो क्या निर्भय भरद्वाज के बहाने केवंटी और बेनीपुर को प्रभावित करने की है तैयारी! Voice of Darbhanga

दरभंगा। अभिषेक कुमार
राजनीति संभावनाओं का खेल बन गया है। इसमें कब कौन अपना और कौन पराया हो जाय, कहना मुश्किल है। दरभंगा भाजपा में गुटबाजी इनदिनों चरम पर है। हाल ही में इसका उदाहरण स्वास्थ मंत्री मंगल पांडे के कार्यक्रम के दौरान 12 जनवरी को कमला लाइब्रेरी में खुलेआम देखने को मिला था। अध्यक्षीय प्रणाली वाले भाजपा में किसी कार्यक्रम का बैनर पोस्टर लगाने में विधायकों द्वारा जिलाध्यक्ष की गरिमा का धज्जी उड़ाना आम बात हो ही गयी है, विधायकों के समर्थक कार्यकर्त्ता तक जिलाध्यक्ष की उपेक्षा करते खुलेआम करते नजर आते हैं। किसी बैनर में विधायक की तस्वीर न होने पर विधायक अपने समर्थकों से हंगामा तो करवा देते हैं, पर विधायकों के पोस्टर में जिलाध्यक्ष ही गायब रहते हैं, इसपर कोई बोलने वाला नही दिखता।
हाल ही में भाजपा से कभी नही जुड़े रहे निर्भय भारद्वाज को जाले विधायक जिबेश कुमार की अनुसंशा पर भाजपा युवा मोर्चा का जिलाध्यक्ष बना देना भी बड़े विवाद का कारण बना था। इनदिनों जाले विधायक जिबेश कुमार एवं नगर विधायक संजय सरावगी राजनीतिक समीकरणों में अपनी गोटी फिट रखने केलिए करीबी नजर आते हैं। वहीँ केवंटी के पूर्व विधायक अशोक यादव एवं बेनीपुर के पूर्व विधायक सह भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष गोपालजी ठाकुर का अलग खेमा दिख रहा है। बाकी पेंदी विहीन अधिकतर नेता-कार्यकर्त्ता इन्ही खेमो में कभी इधर तो कभी उधर लुढ़कते गुरकते नजर आते हैं।
पार्टी के करीबी एवं निर्भय भारद्वाज के भी करीबी सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक निर्भय भारद्वाज का चेहरा आगे कर युवा मोर्चा की टीम में प्रमुख पदों पर या तो अपने विश्वासपात्र नही तो नये चेहरे को जगह दिलाकर विधायक द्वय खेमा द्वारा अपने विरोधी खेमे को एकसाथ ध्वस्त करने की एक बड़ी योजना की तैयारी की जा रही है। ब्राह्मण समुदाय से आने वाले निर्भय भारद्वाज केवंटी विधानसभा के स्थानीय निवासी हैं। केवंटी का प्रतिनिधित्व भाजपा की ओर से अशोक यादव करते रहे हैं। अब भारद्वाज समर्थकों द्वारा एक चर्चा शुरू की जा चुकी है कि केवंटी में मुस्लिम के बाद दूसरी सबसे बड़ी संख्या ब्राह्मणों की है। तो फिर वहां का उम्मीदवार ब्राह्मण क्यों नही। यह चर्चा भरद्वाज के करीबी लोग भी करना शुरू कर चुके हैं। करीबी सूत्रों की माने तो दरभंगा में गठबन्धन रहा तो दो सीटें ब्राह्मण कोटा में जाएंगी। जाले में ब्राह्मण कोटा से सिटिंग एमएलए जिबेश कुमार हैं तो उनका टिकट कन्फर्म ही है। लगे हाथ मुहीम ने रंग पकड़ा तो केवंटी में ब्राह्मण उम्मीदवार की मांग उठ जाएगा। इस प्रकार अशोक यादव का पत्ता कट जाएगा। और यदि ये दोनों सीट ब्राह्मण कोटा में चले जाएगा तो बेनीपुर किसी अन्य कोटे में चला जाएगा
और वहाँ से स्वतः गोपालजी ठाकुर का पत्ता भी साफ़ हो जाएगा। इस प्रकार संजय सरावगी के दो धूर विरोधी माने जाने वाले कद्दावर नेता का पत्ता ही साफ़ हो जाएगा और विकल्पविहीन होने पर पार्टी में सरावगी-जिबेश का वर्चस्व कायम रहेगा।

