
शिक्षा और स्वास्थ बुनियादी आवश्यकता होने के वाबजूद महंगा होना देश का दुर्भाग्य: भागवत। Voice of Darbhanga
दरभंगा : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने शिक्षा और स्वास्थ्य को बुनियादी आवश्यकता बताते हुए कहा कि इन दोनों का महंगा होना देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है. बुधवार को विवेकानंद कैंसर अस्पताल का उद्घाटन करने के बाद आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री भागवत ने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ बुनियादी आवश्यकता है, लेकिन यह दुर्भाग्य है कि देश में दोनों ही चीजें काफी महंगी है. उन्होंने कहा कि देश के सभी व्यक्ति दोनों सेवाएं सस्ती और सामान रूप से मिले, यह आवश्यक है. सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए. उन्होंने कहा कि यह विडम्बना है कि अपने ही देश में गरीबों को अपना ईलाज कराने के लिए घर गिरवी रखना पड़ता है. उन्होंने कहा कि हमे सिर्फ एलोपेथिक चिकित्सा पर ही निर्भर नहीं होना चाहिए, बल्कि हमारी प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति भी उन्नत और समृद्ध है. श्री भागवत ने कहा कि समाज सेवा से बड़ा धर्म नहीं है. उन्होंने कहा कि देश में समृद्ध लोगों की कमी नहीं है. जरूरत है मन में ठानकर गरीबों की सेवा की जानी चाहिए. इस मौके पर केन्द्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी चौबे ने कहा कि कई संस्थानों से मिलकर बिहार में आधे दर्जन कैंसर डिटेकटिव सेंटर खोले जाएगे. जो पीपी मोड पर कार्य करेंगे. उन्होंने कहा कि तम्बाकू और शराब से सबसे से ज्यादा कैंसर होता है, इसके खिलाफ लोगों को जागृत करने की आवश्यकता है. इस मौके पर बिहार सरकार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में बिहार तेजी से आगे बढ़ रहा है. वहीं पद्मश्री से सम्मानित डॉ. सीपी ठाकुर ने कैंसर से पूर्व जांच के लिए खोले जा रहे केन्द्रों का फायदा आमजनों को उठाना चाहिए. कार्यक्रम की अध्यक्षता रामकृष्ण मिशन नई दिल्ली के सचिव स्वामी शांतात्मानंद जी महाराज ने की. इस मौके पर भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष गोपालजी ठाकुर सहित कई सांसद व विधायक भी मौजूद थे.
श्री भागवत के शिक्षा एवं स्वास्थ पर दिए गए वक्तव्य पर जदयू विधायक सह प्रश्न एवं ध्यानाकर्षण समिति के सभापति अमरनाथ गामी ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसका स्वागत किया। वॉयस ऑफ़ दरभंगा से बात करते हुए श्री गामी ने कहा कि उन्होंने कई महीनों पूर्व ही इस मुद्दे पर प्रेस कांफ्रेंस कर एवं पत्र लिख कर प्रधानमंत्री से मांग की थी कि हर स्तर के शिक्षा एवं स्वास्थ सेवाओं को पूर्णतः निशुल्क किया जाय। ऐसा करने से सरकार को बहुत ही कल्याणकारी योजनाएं चलाने की जरूरत ही नही पड़ेगी और उसका पैसा बचेगा क्योंकि लोगों का सबसे अधिक खर्चा स्वास्थ एवं शिक्षा पर ही होता है। श्री गामी ने कहा कि इलाज एवं पढ़ाई एक जैसी होनी चाहिए। बाकी कोई अगर पैसा वाला समर्थ व्यक्ति फाइव स्टार सुविधा
रहने आदि का चाहे तो उस सुविधा का अलग से पैसा ले। परंतु गम्भीर से गम्भीर बीमारी का भी इलाज एवं दवा का खर्च बिल्कुल निःशुल्क हो। रहने खाने की सुविधा कोई विशेष स्तर से चाहे तो उस सुविधा का पेड सिस्टम से भुगतान ले। यही व्यवस्था हर स्तर तक की शिक्षा व्यवस्था में भी लागू हो।
ज्ञात हो कि कुछ महीनों पूर्व श्री गामी द्वारा इस मुद्दे को उठाने के बाद विवाद भी उतपन्न हुआ था। बयान में यह कहना कि अगर हर स्तर का शिक्षा एवं स्वास्थ फ्री हो गया तो सब्सिडी आदि वाली योजना सरकार बन्द भी कर दे तो कोई फर्क नही पड़ेगा, यह विवाद का कारण बना था और कुछ विरोधी दलों ने इसे गरीब विरोधी बयान बता कर
विरोध प्रदर्शन कर श्री गामी का पुतला दहन तक कर दिया था। परंतु बाद में बयान को खुद आगे आकर सोशल मीडिया में लगातार अपना पक्ष रखकर श्री गामी ने विरोधियों के हर आपत्ति का जवाब दिया था। तब मामला शांत हुआ था।
बुधवार को श्री भागवत द्वारा इस समस्या को उठाना श्री गामी के दिए बयान पर जहाँ मुहर लगा दिया वहीँ आरएसएस समर्थित समझी जाने वाली भाजपा की अपनी सरकार पर कहीं न कहीं असंतोष का संकेत जरूर दे गया।

