Home मुख्य डा0 मानस बिहारी वर्मा को पद्मश्री की घोषणा से ख़ुशी की लहर। Voice of Darbhanga
मुख्य - January 25, 2018

डा0 मानस बिहारी वर्मा को पद्मश्री की घोषणा से ख़ुशी की लहर। Voice of Darbhanga

दरभंगा: प्रसिद्ध वैज्ञानिक व शिक्षाविद् डॉ. मानस बिहारी वर्मा को पद्मश्री से नवाजे जाने की खबर मिलते ही गुरुवार को यहां लोगों के बीच खुशी की लहर फैल गई। कई दशकों से विभिन्न क्षेत्रों में डॉ. वर्मा के विशिष्ट योगदान को देखते हुए इस खबर ने लोगों को काफी सुकून पहुंचाया है। डीआरडीओ के पूर्व वैज्ञानिक व एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी के निदेशक के रूप में उनकी देखरेख में लड़ाकू विमान तेजस का निर्माण किया गया था। सुपरसोनिक फाइटर एयरक्रॉफ्ट तेजस आज भारतीय वायु सेना की शक्ति बढ़ा रहा है। इस क्षेत्र में अहम योगदान करने के अलावा शिक्षा के क्षेत्र में दूर दराज के गांव में जाकर डॉ. वर्मा सेवानिवृति के बाद बच्चों में शिक्षा की अलख जगाते रहे। पूर्व राष्ट्रपति व मिसाइल मैन डॉ. ए पी जे अब्दुल कलाम से डॉ. वर्मा की गहरी मित्रता थी। उनके बुलावे पर डॉ. कलाम दो बार दरभंगा आए। घनश्यामपुर प्रखंड के दूर दराज गांव बाउर में 29 जुलाई 1943 को डॉ. वर्मा का जन्म हुआ था। प्रारंभिक शिक्षा गांव में ही ग्रहण करने के बाद उच्च शिक्षा के लिए वे पटना चले गए। पटना विश्वविद्यालय से उन्होंने मेकेनिकल इंजीनियर की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद लम्बे समय तक उन्होंने वैज्ञानिक के रूप में डीआरडीओ एवं एनोनॉटिकल डेवलप्मेंट एजेंसी में अपनी सेवा दी।सेवानिवृत होने के बाद डॉ. कलाम के अगस्ता फाउंडेशन की मदद से उन्होंने बाउर व अन्य दूरदाज गांव के मुसहर टोला में 11 संध्या शिक्षा सेंटरों की स्थापना की। वहां जाकर वे वंचित बच्चों को शिक्षा प्रदान करते थे। अगस्ता फाउंडेशन की ओर से प्राप्त तीन चलंत साइंस व कम्प्यूटर लैब के जरिए उन्होंने जिले के दर्जनों स्कूल जाकर बच्चों को आगे चलकर वैज्ञानिक बनने के गुर सिखाए। वे वॉटर रिसोर्स मैनेजमेंट सहित समाजिक कार्यों में लगे हुए हैं। सेवानिवृत होने के बाद वे ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के वीमेंस इंस्टीच्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के पहले निदेशक बनें। वे लहेरियासराय के बरहेत्ता रोड स्थित आवास पर रहते हैं।

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