
प्रशासन के साथ सत्ताधारी से लेकर विपक्षी दलों तक के बेशर्मी को दिखा रहा है एक बोर्ड। Voice of Darbhanga

दरभंगा। अभिषेक कुमार
प्रखंड, जिला एवं प्रमंडलीय मुख्यालय से बमुश्किल दो किलोमीटर की दूरी पर मुख्य सड़क के किनारे अतिपिछड़ा बहुल एक गाँव जहाँ आजादी के 70 साल बाद भी किसी ने दसवीं पास नही किया। न कोई हॉस्पिटल, न कोई स्कूल, न आंगनबाड़ी, न सामुदायिक भवन, न सड़क, न कोई सुविधा। प्रतिनिधित्व की बात करे तो यहां माले के मुखिया ही वर्तमान एवं ज्यादातर समय रहे हैं। पिछले पंचवर्षीय में अतिपिछड़ी जाति के जदयू विधायक रहे हैं। वर्तमान में राजद के विधायक हैं। भाजपा जिलाध्यक्ष यहां से विधायक बनने का ख्वाब संजोते हैं। प्रखण्ड मुख्यालय से एक किलोमीटर की दूरी है। करीब ढाई किलोमीटर की दूरी जिला से लेकर प्रमण्डल स्तर के सारे पदाधिकारी बैठते हैं। आजादी के सत्तर साल बाद तक अछूता रहने के बाद एक मीडियाकर्मी की पहल पर इस गाँव की चर्चा करीब तीन महीने पूर्व स्थानीय से लेकर राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय मीडिया में चर्चा का विषय बना। फिर भी न ही सत्ता पक्ष और न विपक्ष और न प्रशासन की कुम्भकर्णी नींद खुली। तब जाकर ग्रामीणों ने गाँव के बाहर मुख्य सड़क के किनारे एक बोर्ड लगा दिया। यह जो बोर्ड लगा है, केवल बोर्ड नही, तमाम राजनितिक दलों एवं सरकार के मुँह पर कड़ा तमाचा है।
जी हां, हम बात कर रहे हैं जिले के बहादुरपुर प्रखंड के बहादुरपुर देकुली पंचायत के वार्ड 10 के गोशलावर गाँव की। यहां विकास की कोई रौशनी नही पहुँची। वार्ड के वार्ड सदस्य तक दूसरे गाँव के हैं। वर्तमान ने मुखिया माले नेता नन्दलाल ठाकुर हैं जो पूर्व में भी रह चुके हैं। वर्तमान में राजद के कद्दावर नेता भोला यादव यहां से विधायक हैं। खाद्य उपभोक्ता मंत्री मदन सहनी का यह गृह क्षेत्र है और उन्ही के जाति के पूरे लोग इस गाँव में रहते हैं। पिछले पंचवर्षीय वे यहां से जदयू के विधायक थे। भाजपा के जिलाध्यक्ष हरी सहनी यहां से विधानसभा का चुनाव लड़ते हैं।
कुल मिलाकर आजादी के सत्तर साल बाद यह गाँव केवल सरकार द्वारा ही उपेक्षित नही रहा,बल्कि तमाम राजनितिक दलों के द्वारा भी उपेक्षित रहा। तीन महीने पहले चर्चा में आने के बाद प्रशसनिक स्तर पर विकास की बयानबाजी भी शुरू हुई, परंतु तीन महीने बीत जाने के बाद भी एक सुई तक का विकास नही हुआ। तब ग्रामीणों ने लहेरियासराय-बहेड़ी मुख्य मार्ग पर देकुली मोड़ के समीप करीब एक सप्ताह पहले एक बोर्ड लगा दिया जिसमें स्पष्ट लिखा हुआ है कि आजादी के सत्तर साल बाद भी इस गाँव का कोई विकास नही हुआ है। इस रास्ते से तमाम जन प्रतिनिधि एवं आलाधिकारी भी गुजरते हैं। लोगों की नजर सतत इस बोर्ड पर चला जाता है। फिर भी किसी प्रकार का अब यदि संज्ञान नही लिया जाता है तो शायद इसे प्रशासनिक एवं प्रतिनिधियो के बेशर्मी की हद की कही जा सकती है।

