
प्रदर्शनकारी जब नही मान रहे थे बात तो एकबार फिर भाजपा नेता ही बने प्रशासन के तारणहार। Voice of Darbhanga
दरभंगा। अभिषेक कुमार
शहर में अन्य जनआंदोलन की तरह सोमवार को रजनीश हत्याकांड के विरोध में भी हो रहे जनआंदोलन जब उग्र हो रहा था और लोग प्रशासन के समझाने पर शांत नही हो रहे थे तो हरबार की तरह एकबार फिर प्रशासन की मदद में आगे आये जिला भाजपा के चुनिंदा नेता द्वय।
इन दो नेताओं का चेहरा हर जनआंदोलन में शहर में ख़ास कर देखने को मिल ही जाता है जब कोई आंदोलन बिना ऑनस्पॉट मांग मानने या ठोस आश्वासन के बिना खत्म नही हो रहा हो। ये दो तीन चुनिंदा नेतागण कभी जनआंदोलन की अगुआई में प्रायः नही देखे जाते, बल्कि प्रशासन के लिए उतपन्न हो रही ऐसी विकट परिस्थिति में तब ये खड़ा होते हैं ताकि शांति व्यवस्था कायम रहे। पिछले जनआंदोलनो की तरह इसबार भी ये नेता द्वय जनता के बीच आये और फिर प्रशासन से वार्ता की। और नेताज़ी ने ही लोगो को मौखिक रूप से कह दिया कि सब हो गया। अब जाम खत्म कीजिये। हलाँकि कुछ लोगों ने विरोध भी किया। तो ऐसे में प्रशासन के सबसे चहेते नेता ने तुरन्त मैनेज करते हुए कहा कि आप भी आईये और जो लिख कर दीजियेगा, सब माना जाएगा। फिर इसी तरह दो तीन प्रमुख लोगो को साथ लेकर शांत करा देने के बाद आंदोलन शांत हो गया। और हां, ऐसे नेता मांग पत्र अधिकारी को देने में या सामाचारो में देने में जनहितैषी नेता होने का अपना सबसे ज्यादा प्रचार कैसे हो, इसका ख्याल रखे बिना कोई कार्य नही करते।
इसका सटीक उदाहरण प्रेस रिलीज में भी देखने को मिल जाता है। अपनी तारीफें की पुल तो बांधा जाता है। पर हाल में अपने नेता के विरोध करने वाले संगठन मिथिला स्टूडेंट यूनियन के सबसे ज्यादा सक्रिय रूप से सदस्य थे, किंतु उनका नाम कहीं नही आया। यह आंदोलन जनआंदोलन था पर, इस आंदोलन में भी पार्टी नेता बनकर प्रशासन के साथ साथ सामाचारो में क्रेडिट लेने का जबरदस्त मैनेजमेंट भी नेताजी को आता है।

