
हमे अपने धरोधर की रक्षा स्वयं करनी होगी: कुलपति। Voice of Darbhanga
दरभंगा: लनामिविवि के कुलपति प्रो. सुरेन्द्र कुमार सिंह ने कहा कि सांस्कृतिक धरोहर की रक्षा के लिए विवि कृतसंकलिप्त है। अपनी धरोहर की रक्षा करने के लिए स्वयं पहल करनी होगी। उन्होंने शुक्रवार को राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन, नई दिल्ली व महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह सामाजिक विज्ञान संस्थान एवं शोध पुस्तकालय के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित पांच दिवसीय कार्यशाला के समापन सत्र को संबोधित करते हुए उक्त बातें कहीं। उन्होंने कहा कि मिथिला की गौरवशाली और समृद्धशाली परंपरा है। लेकिन, इसे बरकरार रखने के लिए हमें आगे आना होगा। इसके लिए आम लोंगों में कर्तव्य बोध हो इसके लिए जागरूकता पैदा करने की आवश्कता है। उन्होंने कहा कि पांडुलिपि के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में यह कार्यशाला छोटा सा प्रयास है। लेकिन, लगातार छोटे-छोटे प्रयास ही बड़ा परिणाम देते हैं। घर- घर में पड़ी पांडुलिपियों का संरक्षण तभी हो सकता है जब यहां पर पांडुलिपि संसाधन केंद्र तथा संरक्षण केंद्र की स्थापना होगी। मुख्य अतिथि दिल्ली विवि के पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. डीबी सिंह ने कहा कि मिथिला में ज्ञान की परंपरा रही है। आवश्यकता है अपने अतीत से सीख लेते हुए भविष्य के निर्माण की। मिथिला की पांडित्य परंपरा पर चर्चा करना सूर्य को दीपक दिखाने के समान है। उन्होंने कहा कि यहां की पांडुलिपियों में ज्ञान का भंडार है। इसके प्रकाशन होने से मिथिला का विश्व में पहचान बनाने के लिए सार्थक प्रयास होना चाहिए। विशिष्टि अतिथि प्रो. जितेन्द्र नारायण ने कहा कि पुस्तकालय हमारी धरोहर है। पांडुलिपि मिशन के कार्य की उन्होंने सराहना की और पांडुलिपियों के संरक्षण को महत्वपूर्ण बताया। अतिथियों का स्वागत डॉ. राम भरत ठाकुर व धन्यवाद ज्ञापन संगठन सचिव संतोष कुमार झा ने किया।

