
लोक अदालत में पक्षकार ही समझौता का ढूंढ़ते है मार्ग : जिला जज। Voice of Darbhanga
दरभंगा : यह जज साहब की अदालत नहीं, बल्कि यह आपकी अदालत है. यहां पक्षकार हीं समझौता का मार्ग ढूंढते हैं. जिसपर लोक अदालत की मुहर लगती है. जनसंख्या वृद्धि के साथ-साथ मुकदमों का बोझ बढ़ता है. अदालतों पर छोटे-छोटे मुकदमों का बोझरुपी बीमारी का ईलाज के लिए लोक अदालत सर्वोत्तम माध्यम है. इसके माध्यम से मुकदमों का स्थाई समाधान प्राप्त होता है. उक्त बातें जिला विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा शनिवार को सिविल कोर्ट प्रांगण में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्घाटन पश्चात अपने संबोधन में जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह प्राधिकार के अध्यक्ष अरुणेंद्र सिंह ने कही. जिलाधिकारी डॉ. चन्द्रशेखर सिंह ने कहा कि लोग छोटे-छोटे विवादों में उलझकर अदालतों का चक्कर लगाते रहते है. इससे निजात दिलाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर सम्पूर्ण देश में लोक अदालतें आयोजित की जा रही है. वरीय पुलिस अधीक्षक सत्यवीर सिंह ने कहा कि लोक अदालत अपने मुकदमा को खुद समाप्त कराने का कानूनी अधिकार पक्षकारों को देती है. इससे लोगों को समय की वचत तो होती हीं है, न्यायालय के बहुमूल्य समय की भी वचत होती है. कार्यक्रम में प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश अजित कुमार सिंहा, पंचम अपर सत्र न्यायाधीश रूपेश देव, प्राधिकार के सचिव आशुतोष खेतान, मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी सम्पत कुमार, ऐसीजेएम राजेश कुमार द्विवेदी , अजय कुमार, जनीश रंजन, अमित कुमार, अनुमंडल न्यायिक दंडाधिकारी दीपांजन मिश्र, शैलेन्द्र कुमार, मनीष कुमार और अधिवक्ता सोहन सिन्हा, चन्द्रधर मल्लिक सहित न्यायलय कर्मी एवं भारी संख्या में पक्षकार मौजूद थे. कार्यक्रम का संचालन प्राधिकार के सचिव आशुतोष खेतान ने किया.

