
आजादी के बाद पहलीबार मैट्रिक की परीक्षा में शामिल हुई गोसलावर की चार बेटियां। Voice of Darbhanga
दरभंगा: जिला एवं प्रमंडलीय मुख्यालय से मात्र करीब ढाई किलोमीटर की दूरी पर अवस्थित बहादुरपुर प्रखंड के बहादुरपुर-देकुली पंचायत के गोसलावर गाँव के दुर्दशा की कहानी वॉयस ऑफ़ दरभंगा ने प्रमुखता से दिखाई थी। आजादी के सत्तर साल बाद भी इस गाँव में एक भी दसवीं पास नही है। न ही कोई स्कूल, न कोई हॉस्पिटल, न आंगनबाड़ी केंद्र, न सड़क आदि। हाल ही में ग्रामीणों ने सरकार को तमाचा मारने वाला एक बोर्ड भी मुख्य सड़क के किनारे लगा दिया था। इस कहानी के चर्चा में आने के बाद बुधवार को पुनः यह गाँव चर्चा का विषय बना है।
दरअसल, गोसलावर गांव की चार लड़कियां पहली बार 2018 में मैट्रिक की परीक्षा दे रही हैं। गांव में जमीन न मिलने की वजह से विद्यालय नहीं बन सका, फिर भी पास के आनन्दपुर स्थित ललितेश्वर मधुसुदन उच्च विद्यालय में नामांकन कराया और इस साल मैट्रिक की परीक्षा दे रही हैं। गरीब परिवार से आने वाली पूजा, नेहा और गीता के पिता छोटे कबाड़ी व्यवसाई हैं। पहली बार मैट्रिक की परीक्षा देने के उत्साह क्या होता है ये इनके चेहरे पर साफ झलक रहा था। इस गांव में पहले कभी आठवीं से ज्यादा तक किसी ने पढ़ाई नहीं की है। पहली बार मैट्रिक की परीक्षा दे रही पूजा बताती है कि उसका प्रिय विषय हिंदी है इसलिए उसके पसंदीदा साहित्यकार हजारी प्रसाद द्विवेदी, रामविलास शर्मा हैं। वहीं, सरकार की योजना के तहत साइकिल मिलने से प्रसन्न नेहा भी खुश नजर आती है।
बेटियों के इस हौसले से पूरा गाँव खुश नजर आता है। पूरे गाँव में उत्साह का माहौल बना हुआ है। इन चारों बेटियों का परीक्षा देना मानो गाँव में उत्सव जैसा लग रहा है जिसे लोग आजादी के सत्तर साल बाद मनाते नजर आ रहे हैं।

