
भारत-नेपाल के बीच आत्मीय सम्बन्ध: परमानन्द झा। Voice of Darbhanga
दरभंगा: नेपाल के पूर्व उप राष्ट्रपति परमानंद झा ने कहा कि भारत- नेपाल के बीच आत्मीय संबंध को प्रगाढ़ बनाने के लिए प्रबुद्ध लोगों को आगे आना होगा। भारत के विश्वविद्यालयों में गुणवतापूर्ण शिक्षा विश्व के किसी भी विवि से कम नहीं है। वे सोमवार को लनामिविवि पूर्ववर्त्ती छात्रों के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस सम्मेलन को भारत- नेपाल संबंध की कड़ी बताते हुए उन्होंने कहा कि एक देश के दूसरे देश के साथ दो तरह का संबंध होता है। एक सरकार स्तर का दूसरा जनता स्तर का। नेपाल- भारत का संबंध दोनों स्तर का है। भारत व नेपाल के बीच रोटी- बेटी का संबंध रहा है। भारत की 30 फीसद लड़कियां विवाह कर नेपाल जाती थीं। लेकिन, नेपाल में नए संविधान बनने के बाद से इसमें कमी हुई है। इसको लेकर मधेशी आज भी आंदोलन कर रहे हैं। नेपाल के सीमावर्ती इलाके के अधिकांश लोग भारत सें सामान खरीद कर लाते थे। इधर, एसएसबी की नियुक्ति के बाद चेकिंग ज्यादा बढ़ जाने से भी फर्क पड़ा है। नेपाल में पहले शैक्षणिक संस्थानों की कमी थी। जिसका नतीजा था कि मधेशी मूल के नागरिक पहाड़ पर जाकर शिक्षा ग्रहण करने के बजाए भारत के विवि में जाकर अध्ययन करना पसंद करते थे। नेपाल के छात्रों की पहली प्राथमिकता भारत थी। लेकिन, आज परिस्थिति बदल गई है। नेपाल में भी शिक्षण संस्थानों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। जिस वजह से अब यहां नेपाल के छात्रों की संख्या में कमी आई है। नेपाल में पढ़े लिखें लोगों की संख्या कम है। भारत में नेपाल के अधिक से अधिक छात्र आकर पढ़े इसके लिए प्रयास होना चाहिए। ताकि भारत- नेपाल के बीच आत्मीय संबंध बरकरार रहे। मालूम हो कि परमानंद झा लनामिविवि के छात्र थे।

