
एनएच 57 पर फिर हुआ हादसा, खगड़िया के जज की मौत,पत्नी सहित तीन गम्भीर। Voice of Darbhanga
दरभंगा: एनएच 57 इन दिनों मौत का सबब बन गया है. दुर्घटना में न्यायिक सेवा के एक अधिकारी की आज फिर दुर्घटना में मौत हुई है. आज रविवार को भालपट्टी सहायक थाना के ठीक सामने कार दुर्घटना में फास्ट ट्रेक कोर्ट खगड़िया के जज अरुण कुमार झा की दर्दनाक मौत हो गई है. वहीं पत्नी समेत तीन लोग बुरी तरह घायल है. जिन का ईलाज डीएमसीएच के आपातकालीन विभाग में चल रहा है. घटना के संबंध में बताया जाता है कि खगरिया के फास्ट ट्रैक कोर्ट के जज अरुण कुमार झा अपने ससुराल गारा टोल फुलपरास-मधुबनी से पटना जा रहे थे, इसी बीच सदर थाना क्षेत्र के भालपट्टी ओपी के नजदीक पुल के डिवाइडर से उनकी गाड़ी टकरा गई. मौके पर ही जज की मौत हो गई. उनकी समधिन शकुंतला देवी, पत्नी रीता झा और ड्राइवर सुरेश कुमार बुरी तरह घायल हैं. जिन्हें ईलाज के लिए भालपट्टी ओपी थाना की पुलिस ने सुधा डेयरी के गाड़ी से डीएमसीएच के इमरजेंसी विभाग में पहुंचाया. जहां डाक्टर ने जज को मृत घोषित कर दिया. वहीं तीनों की चिंताजनक हालत को देखते हुए पटना के लिए रेफर कर दिया गया है. खबर पाते ही जिले के कई आला अधिकारी डीएमसीएच पहुंच गए. घटना दिन के तीन बजे की है. ज्ञात हो कि एनएच 57 पर लगातार तीन दिनों से दुर्घटनाओं में मौत का सिलसिला जारी है. तीन दिनों में सात लोगों की मौत सिर्फ दरभंगा जिला क्षेत्र में हुई है. जिलाधिकारी ने कई बार दुर्घटना स्थल को चिंहित करने का आदेश दिया था, लेकिन न तो जगह चिंहित किये गये और न ही एनएच वालों ने दुर्घटना रोकने की दिशा में पहल की. प्रत्यक्षदर्शियों की माने तो दरभंगा जिला में अनेकों जगह सड़क के ऊपर से क्रॉसिंग बनाया गया है. कई जगह तो अनाधिकृत रूप से भी क्रॉसिंग लोगों ने बनाया है. इतना ही नहीं फोरलेन सड़क पर वाहनों का स्पीड 100 कि.मी. से ऊपर रहता है. जबकि सड़क की स्थिति 40 कि.मी. के स्पीड की भी नहीं है. सड़क की हालत जर्जर हो चुकी है. जरूरत है कि हाईवे को प्लेन बनाने की. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आज की दुर्घटना भी रफ्तार के कारण हुई है. सड़का के गड्डे को बचाने के क्रम में चालक का वाहन पर से नियंत्रण खत्म हुआ और कार पुल से टकरा गया. सबसे बड़ी बात है कि फोरलेन पर एम्बुलेन्स की व्यवस्था नहीं थी. जिसके कारण सुधा डायरी के दूध की गाड़ी से मृतक एवं घायलों को अस्पताल भेजा गया. अगर एम्बुलेंस की व्यवस्था रहती तो जज जान बच सकती थी.

