
मैथिलि भाषा के अपमान को लेकर विशेषाधिकार याचिका दायर करेंगे कीर्ति आज़ाद। Voice of Darbhanga
दरभंगा: मैथिली भाषा क्या सिर्फ मौखिक भाषा है या इसकी लिपि भी है? इस मुद्दे पर विवाद तेज हो गया है। विवाद केंद्र सरकार कि ओर से लोकसभा में दिये गये एक जवाब के बाद शुरू हुआ है । बीजेपी से निष्कासित दरभंगा के सांसद कीर्ति आजाद की ओर से पूछे गए सवाल पर मानव संसाधन मंत्रालय ने कहा कि मैथिली भाषा मौखिक भाषा ही रही है और मैथिली के लिये आधिकारिक सूचना और पाठ्यपुस्तकें देवनागरी लिपी में लिखी गई है और इस भाषा के प्रचार -प्रसार के लिये कोई योजना नही है । मैथिली भाषा मूलरूप से बिहार के मिथिलांचल में बोली जाती रही है ।
इस जवाब पर कड़ी आपत्ति जताते हुए श्री आजाद ने कहा कि ये सरासर मैथिली का अपमान है । उन्होने कहा कि मैथिली की लिपि भारत की सबसे पुरानी लिपि में रही है और अभी भी पढ़ाई से लेकर लेखन में इसका उपयोग हो रहा है।ऐसे में मैथिली लिपि को खारिज कर देना देश की सबसे पुरानी भाषा का अपमान है। उन्होंने कहा कि वह सरकार से आग्रह करेंगे कि उसको दुरुस्त किया जाय ओर मैथिली लिपि को स्वीकार कर इसके प्रचार प्रसार के लिए प्रयास किया जाय।सरकार के जवाब के उलट मैथिली की अपनी लिपि अभी भी प्रचलित है ओर बिहार में इस भाषा कि परीक्षा में इस लिपि का वलन है।

