Home मुख्य मॉडर्न फिजिक्स में स्टीफन हॉकिंग का योगदान विषय पर संगोष्ठी का आयोजन। Voice of Darbhanga
मुख्य - March 19, 2018

मॉडर्न फिजिक्स में स्टीफन हॉकिंग का योगदान विषय पर संगोष्ठी का आयोजन। Voice of Darbhanga

दरभंगा: 8 जनवरी 1942 को इंग्लैड के आॅक्सफोर्ड में जन्मे स्टीफन विलियम हाॅकिंग का पूरा जीवन मानवता को समर्पित रहा है। वे सैद्धांतिक भौतिकी विज्ञानी थे, जिन्हें ब्रह्यंड विज्ञान, सामान्य सापेक्षता और क्वांटम ग्रेविटी के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए जाना जाता है। 1960 एवं 1970 के दशक में उन्होंने सामान्य सापेक्षता के ढ़ांचे के भीतर एकरूपता के बारे में भू-खंडित प्रमेयों पर काम किया और सैद्धांतिक भविष्यवाणी की है कि ब्लैक हाॅल विकिरण का उत्सर्जन करता है। इसे ही आज दुनियां ‘हाॅकिंग विकिरण’ के नाम से जानती है। उक्त बातें स्वयंसेवी संस्था डाॅ. प्रभात दास फाउण्डेशन एवं नागेन्द्र झा महिला महाविद्यालय के भौतिकी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘‘मार्डन फिजिक्स में स्टीफन हाॅकिंग का योगदान’’ विषयक संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में अपने विचार प्रस्तुत करते हुए लनामिविवि के पूर्व भौतिकी विभागाध्यक्ष डाॅ. अरूण कुमार मिश्रा ने कही। उन्होंने बताया कि स्टीफन हाॅकिंग अवलोकन के मुकाबले सिद्धांत में गहरी रूची रखते थे। उन्होंने ब्लैक होल, स्ट्रिंग थ्योरी और आकाशगंगा में ब्लैक होल के जन्म के विस्फोट में अनुसंधान किया। उनके काम ने क्वाॅल्यूम गुरूत्वाकर्षण के एक सम-समेकित सिद्धांत, सामान्य सापेक्षता और क्वाटम सिद्धांत की आवश्यकता को भी जोर देकर इंगित किया है। विशेषकर अगर हम समझाते है कि बिग बैंग के समय वास्तव में क्या हुआ। 1974 की शुरूआत में ब्लैक होल से हाॅकिंग विकिरण के उत्सर्जन के उनके सिद्धांत पर और अधिक कार्य करने की जरूरत है। डाॅ. मिश्रा ने बताया कि 22 वर्ष की उम्र में पक्षपात से ग्रसित होने के बाद भी हाॅकिंग ने हार नहीं मानी और अपने कार्यो की बदौलत कई कृतिमान स्थापित किया। विद्यार्थियों को स्टीफन हाॅकिंग के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए, क्योंकि उनका जीवन चैलेंज है।

विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित लनामिविवि के पूर्व भौतिकी विभागाध्यक्ष डाॅ. अमरेश झा ने कहा कि पूरे शरीर के बेजान हो जाने के बाद भी स्टीफन हाॅकिंग ने दिमाग की बदौलत पूरी दुनिया में अपने कार्यो से अपना लोहा मनवाया। हाॅकिंग ने ब्लैक होल और बिग बैंग सिद्धांत को समझने में अहम योगदान किया। उन्हें 12 मानद डिग्रीया और अमेरिका का सर्वोच्च नागरिक प्रदान हुआ, सिवाय नोबेल के।

इससे पूर्व कार्यक्रम का प्रारंभ उपस्थित अतिथि और विद्यार्थियों ने एक-मिनट का मौन रखकर हाॅकिंग का श्रद्धांजलि देकर किया। विषय प्रवेश करवाते हुए मिल्लत काॅलेज के भौतिकी विभागध्यक्ष डाॅ. महेश चंद्र मिश्र ने हाॅकिंग के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि तमाम प्रतिकूलताओं के बावजूद वे आजीवन मानवता के लिए कार्य करते रहे। अपने सहयोगी बै्रंडन कार्टर, वर्नर इज़राईल और डेविड राॅबिन्सन के साथ उन्होंने जाॅन व्हीलर के ‘नो-हेयर प्रमेय’ के गणितीय सबूत प्रदान किए, जो किसी भी ब्लैक होल को द्रव्यमान, कोणीय गति और विद्युत प्रभार के तीन गुणों से पूरी तरह वर्णित किया गया है तथा ब्लैक होल यांत्रिक के चार नियमों को भी प्रस्तावित किया। कार्यक्रम का संचालन फाउण्डेशन के सचिव मुकेश कुमार झा ने किया। जबकि धन्यवाद ज्ञापन प्रो. अर्पणा झा ने दिया। संगोष्ठी की अध्यक्षता डाॅ महादेव झा ने की। कार्यक्रम में प्रो. सुनील कुमार चैधरी, प्रो. साधना कुमारी, सुधा झा, ममता रानी, सरोज राय, वाणी झा, प्रो. सुरेश राम, राजकुमार गणेशन, मनीष आनंद, नवीन कुमार आदि उपस्थित थे।

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