Home मुख्य निलंबित कक्षपाल राजू के गंभीर आरोपो से जेलर एवं जेल अधीक्षक की करवाई संदेह के घेरे में! Voice of Darbhanga
मुख्य - March 24, 2018

निलंबित कक्षपाल राजू के गंभीर आरोपो से जेलर एवं जेल अधीक्षक की करवाई संदेह के घेरे में! Voice of Darbhanga

दरभंगा: दरभंगा मंडल कारा में शुक्रवार की देर रात हंगामे मामले में नया मोड़ आ गया है। निलंबित कक्षपाल राजू कुमार व अमरेंद्र कुमार के बयान निलंबन की कारवाई को बदले की कारवाई के रूप में भी देखा जा रहा है।

ज्ञात हो कि जेलर ने शनिवार की सुबह कक्षपालों पर हंगामा करने और जेल अधीक्षक ललन प्रसाद सिन्हा व जेलर शंभू कुमार दास के साथ कक्षपालों ने धक्का-मुक्की का आरोप लगाया था। जेलर श्री दास का कहना था कि नाराज कक्षपाल निलंबन वापस करने की मांग कर रहे थे। लेकिन, अधीक्षक श्री प्रसाद मांग को मानने को तैयार नहीं हुए। इससे आक्रोशित होकर कक्षपालों ने अपने अधिकारियों के खिलाफ दु‌र्व्यव्हार किया। घटना की जानकारी मिलते ही सदर एसडीओ डॉ. गजेंद्र प्रसाद सिंह व डीएसपी दिलनवाज अहमद मंडल कारा पहुंचकर मामला शांत कराया। इस दौरान नाराज जवानों की बात भी सुनी गई। मामले को लेकर अधीक्षक ने दोषी जवानों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए डीएम व विभाग को पत्र लिखा। घटना के संबंध में बताया गया कि 18 मार्च को एक बंदी सूरज झा ने जेल में फिनाइल पीकर खुदकुशी की कोशिश की थी। उसे आनन-फानन में डीएमसीएच लाया गया। इलाज से उसकी जान बच गई । बंदी सूरज ने दबंग कैदियों पर पागल कह प्रताड़ित करने व कांके भेज देने का आरोप लगाया था। अधीक्षक ने इस मामले के लिए कक्षपाल राजू कुमार को दोषी माना। पहले उससे स्प्ष्टीकरण मांगा गया। इसके बाद उसे 23 मार्च को देर शाम में निलंबित कर दिया गया। इसके विरोध में कक्षपालों ने हंगामा किया। सुबह में कक्षपाल संघ के अध्यक्ष अमरेन्द्र कुमार राय ने अपने सहयोगियों के साथ दबाव बनाने की कोशिश किया। बात नहीं बनने पर जेल अधीक्षक व जेलर के साथ धक्का मुक्की की। अधीक्षक ने पुन: कार्रवाई करते हुए संघ अध्यक्ष व कक्षपाल अमरेन्द्र कुमार को निलंबित कर दिया । इसके विरोध में कक्षपालों में आक्रोश फूट पड़ा और जमकर हंगामा किया । जेल अधीक्षक ने इसकी सूचना जिला पदाधिकारी चंद्र शेखर सिंह को दी। उनके आदेश पर स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी व पुलिस के जाने पर मामला शांत हुआ । अधीक्षक श्री सिन्हा ने बताया कि उन लोगों का आरोप निराधार है। सही से ड्यूटी नहीं करने के कारण कार्रवाई की गई है।

परंतु इस पूरे मामले में निलंबित कक्षपाल राजू कुमार ने मीडिया को जो बताया उससे पूरा मामला संदिग्ध ही नही हो गया और यदि राजू के आरोपो में दम तो निश्चित रूप से बड़े जाँच की आवश्यकता है। निलंबत किए गए कक्षपाल राजू कुमार ने बताया कि तीन महीने पूर्व वे यहां योगदान दिए हैं। अभी तक उन्हें प्रशिक्षण भी नहीं मिला है। सूरज झा ने पहले आत्म हत्या करने के लिए दो मंजिल छत पर चढ़ा था। इसकी जानकारी जेलर को वॉकी टॉकी के माध्यम से दी गई। लेकिन, वे नहीं आए। किसी तरह से सूरज को उतारा गया। इसके बाद सूरज शौचालय जाने की बात कही। इस दौरान हम बाहर खड़े थे और सूरज अंदर में फिनाइल पी लिया। जानकारी मिलते ही अधीक्षक सहित कई अधिकारी मौके पर आए और सूरज को डीएमसीएच में भर्ती कराया । जहां वह सुरक्षित बच गया। इस मामले सिर्फ उन्हें दोषी बताना गलत है क्योंकि बाथरूम के अंदर फिनाइल रखने या हटाने की जिम्मेवारी उनकी नही है। स्पष्टीकरण का जवाब देने दौरान ही निलंबन का पत्र थमा दिया गया। जो न्याय संगत नहीं है। उन्होंने कहा कि दरअसल, हम लोगों से बदला लिया गया है। जेल प्रशासन की कर्मियों के साथ तानाशाही एवं घूसखोरी के खिलाफ 26 दिसंबर 2017 को कक्षपालों की एक बैठक हुई । उसमें अमरेन्द्र कुमार राय को अध्यक्ष तथा उन्हें उपाध्यक्ष बनाया गया। इसके बाद महिला बल को दो दिनों का विशेष अवकाश नहीं देने व सर्विस बुक व वेतन पंजी खोलने के लिए एक-एक हजार रुपये जेलर व बड़ा बाबू की ओर से मांगे जाने की शिकायत अधीक्षक से की गई। जिसमें दोनों को कड़ी फटकार लगी। तब से उन लोगों को सबक सिखाने की धमकी दी जा रही थी। जब उन्हें निलंबित किया गया तो सब मिलकर जेलर से मिन्नत करने गए थे कि अभी तक राजू की पहली सैलरी भी नही मिली है। कैरियर खराब हो जाएगा। निलंबन वापस लेकर उनके कैरियर को बचा लें। परंतु इस मौके को भी अलग रूप देकर उनके अध्यक्ष अमरेंद्र राय को भी निलंबित कर मौके का फायदा उठा लिया गया। वहां मौजूद बीएमपी के संतरी से पूछताछ किया जाय, सीटीटीवी कैमरा देखा जाय तो सच सामने आ जाएगा।

सवाल यह उठता है कि यदि राजू के आरोपो में सच्चाई है तो क्या इसकी निष्पक्ष जांच होगी? या फिर ऐसे ही आवाज उठाने वाले एक दो कक्षपालो की बलि चढ़ा कर जेल का खेल बदस्तूर जारी रहता है।

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