
दीक्षांत समारोह में पाग की उपेक्षा हमारी संस्कृति पर बाहरी संस्कृति का आक्रमण: सुजीत आचार्य। Voice of Darbhanga

दरभंगा: विश्विद्यालय शिक्षा के साथ साथ संस्कृति विस्तार का भी केंद्र होता है जिसके माध्यम से छात्रों को संस्कृति को जानने का मौका मिलता है। दीक्षांत समारोह के ड्रेस कोड मे जिसप्रकार मिथिला के संस्कृति की पहचान पाग की उपेक्षा कर बाहरी संस्कृति को लादने का प्रयास किया गया है, निश्चित रूप से यह हमारे संस्कृति का अपमान है और इसका विरोध होना चाहिए।
उपरोक्त बातें शहर के शुभंकरपुर में शुक्रवार को आयोजित बैठक के दौरान मिथिला विकास संघ के संयोजक सुजीत आचार्य ने कही। उन्होंने इसे मिथिला की संस्कृति पर बाहरी आक्रमण हुए कहा कि जिस सिंडिकेट में मिथिला मैथिली के आजीवन कार्यकर्त्ता, स्थानीय प्रतिनिधि, पूर्व प्रतिनिधि सहित मिथिला के अन्य बुद्धिजीवी शामिल हो वहां इसका अनुमोदन हो जाना अपने आप में आश्चर्य की बात है। किसी एक बाहरी व्यक्ति
द्वारा बाहरी संस्कृति को थोप दिया जाना तमाम ऐसे प्रतिनिधियो के रहते, मिथिला के प्रति हमारे प्रतिनिधियों के चिंता के स्तर की भी पोल खोलता है।
बैठक में निर्णय लिया गया कि कुलपति को ज्ञापन सौंप आपात बैठक बुलाकर ड्रेस कोड में बदलाव का आग्रह किया जाएगा। साथ ही सिंडिकेट सदस्यों के रवैये का पर्दाफाश किया जाएगा।
बैठक में प्रमुख रूप से बालेन्दु झा बालाजी, जय भरद्वाज, कमलेश उपाध्याय, विभूति कुमार मिश्र, कामोद चौधरी, अजयकांत झा, ज्योति सिंह, चंद्रशेखर झा, विकास झा, बाबूसाहेब झा, ज्ञानेश्वर राय, राजीव कुमार झा, रौशन झा आदि ने भी अपने अपने वक्तव्य रखे।

