
बीएड की पढ़ाई के नाम पर हो रहा गोरखधंधा होगा बंद: राज्यपाल। Voice of Darbhanga

दरभंगा: राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा कि बीएड की पढ़ाई में काफी घपला हो रहा है। कुकुरमुत्ते की तरह बीएड कॉलेज उग आए हैं। मनमानी फीस लेकर छात्र-छात्राओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। यह कहने में मुझे जरा भी हिचक नहीं है कि इस धंधे में कई नेता भी शामिल हैं। शिक्षा के नाम पर होने वाले इस तरह के गोरखधंधे को हर हाल में बंद किया जाएगा। बीएड के दाखिले के लिए नीट के तर्ज पर प्रवेश परीक्षा ली जाएगी। परीक्षा के माध्यम से प्रतिभावान छात्र-छात्राओं के साथ न्याय हो सकेगा। वे रविवार को ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के 8वें दीक्षांत समारोह में छात्र-छात्राओं को संबोधित कर रहे थे।
समारोह की अध्यक्षता करते हुए कुलाधिपति ने कहा कि राजभवन के नाम पर किसी को डरने की जरूरत नहीं है। सभी की बात मानी जाएगी। शिक्षा व विश्वविद्यालयों की गतिविधियों में सुधार नहीं हुआ तो किसी को बक्शा नहीं जाएगा। श्री मलिक ने कहा कि विश्वविद्यालयों में 50 साल पुराने पाठ्यक्रम से पढ़ायी हो रही है। नया पाठ्यक्रम बनाने के लिए यूजीसी के पूर्व अध्यक्ष प्रो. यशपाल से मदद ली जा रही है। आज की जरूरतों के अनुसार पाठ्यक्रम तैयार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों की बेहतरी के लिए वे कुलपति व छात्र संघ के पदाधिकारियों के साथ पटना में बैठक करेंगे।
पटना विवि के कॉलेज में शौचालय नहीं होना आश्चर्य:
श्री मलिक ने कहा कि मुझे ये जानकर आश्चर्य हुआ था कि पटना विश्वविद्यालय के एक कॉलेज में छात्राओं को शौचालय की तलाश में डेढ़ किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती थी। इसके बाद सभी विश्वविद्यालयों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि जिन कॉलेजों में मूलभूत सुविधा उपलब्ध नहीं हैं, उन्हें किसी हालत में मान्यता प्रदान नहीं की जाए। पटना विश्वविद्यालय की प्रति कुलपति की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी बनायी गई है। यह कमेटी कॉलेज में छात्राओं के लिए उपलब्ध जनसेवाओं का निरीक्षण करेगी। साथ ही वहां महिला सुरक्षाकर्मी तैनात हैं या नहीं, यह भी देखा जाएगा।
छात्राओं के लिए कैंपस सुरक्षित बने:
श्री मलिक ने कहा कि कैंपस में छात्राओं के साथ छेड़छाड़ की घटना को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। किसी छात्रा के साथ कोई अप्रिय घटना होती है तो थाने जाने की बजाय वह सीधे राज भवन को सूचित करे। राज भवन से थाने को जानकारी देकर कार्रवाई का निर्देश दिया जाएगा।
छात्राओं के बेहतर प्रदर्शन पर जाहिर की खुशी:
शिक्षा के क्षेत्र में छात्राओं के लगातार आगे बढ़ने पर कुलाधिपति ने खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि सारी दुनिया छात्र-छात्राओं के लिए खुली है। बिहार के छात्रों की प्रतिभा का पूरा देश लोहा मानता है। आइएएस की सूची में बिहार के छात्रों की संख्या सबसे अधिक है। मिथिला देश का सबसे प्रसिद्ध सांस्कृतिक केन्द्र रहा है। पढ़ायी के बाद काफी संभावनाएं हैं जिनका लाभ छात्र-छात्राएं कड़ी मेहनत से उठा सकते हैं। श्री मलिक ने विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित दीक्षांत समारोह की खुलकर तारीफ की।
शिक्षा क्षेत्र में हैं अभी कई चुनौतिया
समारोह में शिक्षा मंत्री कृष्णनंदन वर्मा ने कहा कि छात्रों के सामने कई चुनौतियां हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि आदि क्षेत्रों में सुधार के लिए सरकार लगातार काम कर रही है। प्रारंभिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक क्वालिटी एजुकेशन देने का लगातार प्रयास किया जा रहा है ताकि पढ़ायी समाप्त होने के बाद छात्रों को विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार मिलने में परेशानी नहीं हो।
रानी लक्ष्मी बाई कृषि विश्वविद्यालय, झांसी के कुलाधिपति प्रो. पंजाब सिंह ने इस मौके पर दीक्षांत भाषण दिया। मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सुरेन्द्र कुमार सिंह ने विश्वविद्यालय की गतिविधियों पर प्रकाश डाला। रजिस्ट्रार मुस्तफा कमाल अंसारी ने स्वागत व दीक्षांत समारोह का संचालन किया। इस मौके पर पद्म श्री मानस बिहारी वर्मा को डॉक्टरेट ऑफ साइंस की उपाधि से नवाजा गया। वही पद्म भूषण शारदा सिन्हा को डीलिट की उपाधि दी गई। श्रीमती सिन्हा इस मौके पर मौजूद नहीं थीं। 25 छात्र-छात्राओं को स्वर्ण पदक दिया गया।

