Home मुख्य प्रोटोकॉल की जानकारी न होने के कारण अपमानित हुए मैथिली अकादमी के पूर्व अध्यक्ष कमलाकांत झा! Voice of Darbhanga
मुख्य - विशेष - April 18, 2018

प्रोटोकॉल की जानकारी न होने के कारण अपमानित हुए मैथिली अकादमी के पूर्व अध्यक्ष कमलाकांत झा! Voice of Darbhanga

दरभंगा: बिहार में शायद गिने चुने कार्यालय ही ऐसे बच गए होंगे जहां अक्षरशः नियम पर कार्य होता हो और पदाधिकारी कर्तव्यपरायणता की परकाष्ठा को प्रदर्शित करते हों। पर दरभंगा सदर अनुमंडल लोक शिकायत पदाधिकारी सुधांशु शेखर इस युग मे साक्षात धर्मराज युधिष्ठिर के अवतार माने जा सकते हैं जिनके लिए आम और खास में कोई फर्क नही होता। नियम तोड़ कर उनके चैम्बर में चले जाना वाला व्यक्ति चाहे आम हो या खास, सबकी बेज्जती समान रूप से करते हैं भले ही उनके ऐसे कथित प्रोटोकॉल को किसी ने जानकारी के अभाव में ही क्यों न तोड़ने की भूल की हो।
कुछ ऐसा ही मामला बुधवार को सामने आया जब मैथिली अकादमी के पूर्व अध्यक्ष राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त, मिथिला मैथिली के चर्चित हस्ती कमलाकांत झा अपने एक शिकायत की तारीख पर कार्यालय पहुँचे। परंतु वहां जो उनके साथ हुआ, उसे बताते हुए वे फफक पड़े। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने बताया कि मिथिला मैथिली की सेवा करते हुए उन्होंने जीवन गुजार दिया। सबो ने उन्हें प्यार और सम्मान दिया। पर एक पदाधिकारी द्वारा इसप्रकार के सार्वजनिक व्यवहार ने उन्हें आहत कर दिया। अपने बिजली बिल में गड़बड़ी की शिकायत उन्होंने की थी जिसको लेकर डेट पर उन्हें बुधवार को 11 बजे बुलाया गया था। सारा काम छोड़कर वे 11 बजे कार्यालय समय से पहुँच गए। किसी से कोई पैरवी आदि नही करवाई। पूर्व परिचित होने के वाबजूद सामान्य तौर पर गए और बैठ कर अपनी बारी का इंतजार करने लगे। परंतु जब उन्हें मिले समय से एक घण्टा से अधिक बीता और उन्हें नही बुलाया गया तो उन्होंने मिलकर पूछ लेना उचित समझा क्योंकि एक बजे उन्हें एक कार्यक्रम की तैयारी में जाना था। वे उनके चैम्बर में प्रवेश कर अपना परिचय एवं मजबूरी दोनो बताने की कोशिश किये। पर उन्हें रोकते हुए लोक शिकायत पदाधिकारी सुधांशु शेखर ने उन्हें डपटते हुए बाहर जाने को कहा और पुर्जा भेजने के बाद अंदर आने को कहा। सार्वजनिक रूप से ऐसा पहली बार सुनकर उनके कवि ह्रदय को झटका तो लगा पर चुपचाप निर्देशों का पालन कर चैम्बर में गये। उन्हें पुर्जा लगाने वाली बात पता नही थी। चैम्बर में उन्हें डपटते हुए कई कागजातों की कमियां बताते हुए 9 मई को अगली तारीख दे दी गयी। जबकि उन्होंने कहा कि सारे कागजात दे चुके हैं। फिर जब वे दरवाजे से निकलने लगे तो बेज्जती का रहा सहा कसर भी पूरा करते हुए उन्हें कहा गया कि आम नागरिक का रास्ता उधर है, उधर से ही जाएं। निकलते ही उनकी नजर एक परिचित मीडियाकर्मी पर पड़ी तो दर्द को छिपा नही पाए और फफक पड़े।
इस मामले पर कब अनुमंडल लोक शिकायत पदाधिकारी सुधांशु शेखर से प्रतिक्रिया ली गयी तो उन्होंने कहा कि जब कमलाकांत झा अंदर आये तो वे किसी दूसरे का कार्य कर रहे थे। इसलिए उन्हें पुर्जा लगाकर आने को कहा। निकलने में उन्होंने केवल रास्ता निर्देशित किया। उनके लिए आम खास समान हैं। खुद नीतीश कुमार भी आएंगे तो प्रोटोकॉल का पालन करना होगा।
हालाँकि श्री शेखर ने अपने इस कर्म और वचन से धर्मराज के अवतार होने का परिचय तो दिया। पर सूत्रों की माने टी वास्तविकता की कहानी कुछ और भी हो सकती है। जो कर्तव्यपरायणता की परकाष्ठा उन्होंने दिखायी वह हाथी के दिखाने वाले दाँत ही हो सकते हैं क्योंकि नितदिन पदाधिकारियों का आनाजाना होता है और सारे प्रोटोकाल हवा हवाई ही साबित होते हैं। प्रोटोकॉल उनके पद पर नही, निजी सम्बन्धों के अनुसार बदलते रहते हैं। बहरहाल सच जो भी हो, परंतु इतना तो तय है कि पदाधिकारी पीड़ितों का दर्द दूर करने को कार्य करते हैं। यदि किसी को प्रोटोकॉल की जानकारी नही है तो उसे बेज्जती का दर्द देना ऐसे कष्ट हरने वाले पदाधिकारी केलिए कितना उचित है, यह सोचने वाली बात है।

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