Home मुख्य तो क्या दरभंगा में प्रतिभा नही बल्कि क्लबो की पैरवी पर होता है क्रिकेटरों का चयन! Voice of Darbhanga

तो क्या दरभंगा में प्रतिभा नही बल्कि क्लबो की पैरवी पर होता है क्रिकेटरों का चयन! Voice of Darbhanga

दरभंगा। अभिषेक कुमार
हाल के दिनों में जिस तरह के विवाद और खिलाड़ियों के चयन पर सवाल उठे हैं, उससे कहीं न कहीं यह प्रतीत होता है कि दरभंगा जिला क्रिकेट संघ अब शायद प्रशिक्षण कैम्प और क्लब चलाने वालों के मोटी कमाई का जरिया मात्र बन कर रह गया है जहाँ प्रतिभा का दोहन लगातार हो रहा है। संघ कितना मलाईदार है, इसका प्रमाण इससे भी पता चलता है कि सरकारी सेवा में रहने वाले और प्रतिनिधि सह पत्रकार जैसे व्यक्ति भी संघ में पद पाने केलिए जी जान लगाए रहते हैं। हालाँकि सरकारी लाभ के पद पर रहने वाले व्यक्ति या जन प्रतिनिधि आदि के रहने से कहीं न कहीं निष्पक्षता पर सवाल उठना लाजिमी होता है और यदि वे अच्छे खासे क्रिकेट बैक ग्राउंड से नही हैं तो उनके ललायित होने की मंशा भी स्पष्ट दिख जाती है। परंतु शायद इनदिनों राजनीति की तरह क्रिकेट संघ में भी नैतिकता का पतन हो चुका है और केवल पैसा और पावर महत्व रखता है।
दरभंगा में बहुत से प्रशिक्षण कैम्प और क्लब चलते हैं जहाँ बड़े बड़े घराने के राजकुमार बड़ा बड़ा पैसा ख़र्च कर प्रशिक्षण लेते हैं। यदि चयन प्रक्रिया में इन क्लबो के क्रिकेटरों का चयन नही होगा तो इनकी दुकान को ताला लग सकता है। अतः चयन इन्ही के लड़कों का हो, इसके लिए क्लबों द्वारा साम-दाम-दंड-भेद सभी प्रकार के तिड़कम लगा दिए जाते हैं। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रो से आने वाले बिना क्लब की सहायता लिए प्रतिभाओं केलिए कोई विकल्प ही नही बचता।
मंगलवार को भी राज्य स्तरीय अंडर-19 क्रिकेट टूर्नामेंट केलिए दरभंगा जिला की टीम चयन केलिए ट्रायल का आयोजन किया गया। परंतु यहाँ भी हुए चयन की निष्पक्षता पर सवाल उठाने वाले कुछ पहलू सामने आ गए।
ज्ञात हो कि दरभंगा जिला क्रिकेट संघ के चुनाव का विवाद फिलहाल न्यायालय में है। न्यायालय द्वारा तत्काल अधिवक्ता तौसीफ अख्तर को रिसीवर नियुक्त किया गया। मंगलवार को तौसीफ अख्तर द्वारा तीन चयनकर्ता की देख रेख में ट्रायल का आयोजन किया गया। परंतु पूरे ट्रायल के दौरान कोर्ट में पक्षकार बने दो व्यक्ति भी सक्रिय देखे गए वह भी चयनकर्ताओं के साथ लगातार विमर्श करते और खिलाड़ियों को निर्देश देते हुए। यह अपने आप मे न्यायालय की भावना का कहीं न कहीं अपमान जरूर प्रतीत होता है और रिसीवर की मंशा पर भी प्रश्नचिन्ह लगा सकता है। साथ ही साथ ट्रायल के दौरान क्लबो के प्रतिनिधियों द्वारा ही खिलाड़ियों का नाम पुकारा जा रहा था और उन्ही के द्वारा सराहना पर चयनकर्ताओं द्वारा नाम नोट करते भी देखा जा रहा था।
निश्चित रूप से दरभंगा में वैसे भी संसाधनों और मैदानों के अभाव में क्रिकेट की प्रतिभा को उभरने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में इसप्रकार की व्यवस्था कहीं न कहीं प्रतिभाओं के हौसले को तोड़ने का काम ही करती नजर आएगी।

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