
प्रबंधन के खिलाफ हेकॉक इंस्टीच्यूशन की प्राचार्या सहित शिक्षिकाओं ने लगाये गम्भीर आरोप। Voice of Darbhanga

दरभंगा: भाषाई आधार पर खुले सरकारी मान्यता प्राप्त विद्यालयों में बांग्ला भाषाई छात्रों केलिए शहर के बंगाली टोला स्थित हेकॉक इंस्टीट्यूशन के प्रबन्ध समिति के सचिव देवाशीष मुखर्जी पर इंस्टीट्यूशन की प्राचार्या अमिता चटर्जी के साथ साथ ज्योति रॉय, सृष्टि मुखर्जी एवं इंद्रजीत मित्रा आदि ने शोषण एवं प्रताड़ित करने का गम्भीर आरोप लगाया है।
इस आशय का आवेदन देने अन्य शिक्षिकाओं के जिलाधिकारी कार्यालय पहुँची श्रीमती चटर्जी ने बताया कि वे 35 वर्ष से अपनी सेवा दे रही हैं। विद्यालय अपनी पहचान खो रहा है। भवन जर्जर स्थिति में है। कीचड़ पानी सालों भर जमा रहता है। बरसात के दो महीने तो लगभग पूर्णतः ठप हो जाता है स्कूल। ऐसे में उनके द्वारा नये शिक्षिकाओं के साथ मिलकर व्यवस्था बदलने केलिए प्रयास किया गया। सचिव से फंड की कमी न होने पर इन समस्याओं को खत्म करवाने की पहल करने का अनुरोध किया गया।
परंतु सचिव देवाशीष मुखर्जी ने इन्हें छात्रों से पैसा वसूली करने का आदेश दिया। इस पर प्राचार्य ने बालकों के निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिनियम का हवाला दिया और वसूली करने से मना कर दिया। तब उन्होंने कि सभी शिक्षक शिक्षिकाओं से तीस-तीस हजार रुपये एक सप्ताह के अंदर वसूलने को कहा अन्यथा सभी को हटाकर विद्यालय को बंद कर दिया जाएगा। परंतु इन्होंने वसूली से साफ इंकार कर दिया। इसी से बौखला कर पिछले बैठक में सचिव द्वारा अमर्यादित भाषा का उपयोग करते हुए
महिला प्राचार्य को अपमानित किया गया और कुर्सी से उठने केलिए बोलकर जलील किया गया। साथ ही साथ तमाम लोगों के सामने नौकरी से निकाल देने की धमकी दी गयी।
इसी आशय की जानकारी देते हुए अपने सुरक्षा एवं ऐतिहासिक धरोहर हेकॉक इंस्टीट्यूशन को बचा लेने की गुहार लगाने शिक्षिकाओं के साथ जिलाधिकारी के साथ साथ तमाम जिले के वरीय अधिकारियों के साथ पर प्रभारी प्रधानाचार्य अमिता चटर्जी आवेदन दे चुकी हैं।
सूत्रों की माने तो प्रबन्ध समिति के सचिव देवाशीष मुखर्जी के सम्बंध बड़े भूमाफियाओं एवं आपराधिक छवि के बड़े लोगों से भ है। ऐसे में कोई बड़ी बात नही है कि मामले को दबाने और विद्यालय को ध्वस्त कराकर जमीन को भी बेच देने केलिए किसी भी हद तक चले जाएं। बहरहाल देखने वाली बात यह होगी कि इस गंभीर मामले में भी शिकायत पर प्रशासनिक कारवाई हो पाती है या रसूख के बल पर मामले को पुनः दबा दिया जाता है।

