Home मुख्य तमाम आवेदनों के वाबजूद सो रहा बिजली विभाग कर रहा है किसी बड़े हादसे का इंतजार! Voice of Darbhanga
मुख्य - विशेष - May 17, 2018

तमाम आवेदनों के वाबजूद सो रहा बिजली विभाग कर रहा है किसी बड़े हादसे का इंतजार! Voice of Darbhanga

दरभंगा: विद्युत विभाग का निजीकरण हुआ ताकि लोगों को सुविधा मिल सके। विभाग ने चौबीस घण्टे बिजली एवं सुरक्षा के साथ सुविधा आदि प्रदान करने के नाम पर बिजली की दर कई गुणा बढ़ा कर वसूलना शुरू कर दिया। थोड़ा सा बकाया हुआ नही के बिजली काटने तुरंत पहुँच जाते हैं। और तो और लाखो के गलत बिजली बिल भेज कर वसूलने पहुँच जाना नही तो कनेक्शन काट देना आदि भी विभागीय रंगदारी की खासियत बन चुकी है। परंतु उपभोक्ताओं के सुरक्षा एवं सुविधा के प्रति विभाग कितना संवेदनशील है, इसका सटीक उदाहरण देखने कहीं सुदूर क्षेत्र में जाने की जरूरत नही है। शहर के ही वार्ड संख्या 8 के शुभंकरपुर न्यू कॉलोनी में जो मुहल्ले के छोटे सड़क पर आपको नजारा दिखेगा, वह आपको डर की परकाष्ठा न पार करा दे तो फिर कहने की बात नही। यदि आपने गलती से कोई चार चक्का वाहन गली में घुसा दिया और नंगे लटक रहे 11 हजार वोल्ट के तारों पर आपकी नजर नही पड़ी तो आपके परिवार वाले आपके इंसयोरेन्स पेपर का उपयोग जरूर कर लेंगे। पैदल चलने वाले इंसान की हाइट से मुश्किल से दो फीट की ऊंचाई होगी इन खतरनाक लटक रहे तारो की। बच्चो के स्कूल रिक्शा या ऑटो जब इस गली में आता है और यदि कहीं जोर का तूफान आ जाय तो तार टूटे बिना भी टच कर सकती है और बड़ी दुर्घटना घट सकती है।
विभाग द्वारा उस गली में भी एबी केवल लगाने का कार्य किया गया। परंतु करीब दो सौ मीटर की दूरी के बीच मे कोई पोल नही होने के कारण इसके बीच में तार लटक रहा है। किसी प्रकार बांस को तारो में बांध कर निजी मकान से बाँध दिया जाता है, परंतु वह बार बार टूट जाता है। स्थानीय लोगों ने कई बार विभाग को आवेदन दिया है। एक दो बार पोल गाड़ने केलिए विभाग की ओर से लोग आए भी। परंतु स्थल चयन के विवाद के कारण पोल नही गाड़ पाए और चले गए। लोगो का आवेदन देना जारी रहा।
अब सवाल यह उठता है कि क्या एक दो लोगो के विवाद के कारण विभाग सैकड़ो लोगो की जिंदगी को खतरे में डाल कर छोड़े रह सकता है! जब कार्यपालक अभियंता को बार बार आवेदन दिया जा रहा है तो विभाग प्रशासनिक मदद से यथोचित स्थल पर पोल क्यों नही गाड़ रहा! आवेदन की प्रति स्थानीय लोगो द्वारा जिले के प्रशासनिक अधिकारियों को भी दी गयी है। परंतु जिले के अधिकारियों द्वारा भी इतनी बड़ी लापरवाही को प्राथमिकता के तौर पर नही लेना भी जनसुरक्षा को ताक पर रखने का एक बड़ा उदाहरण है। कहीं न कहीं ऐसा प्रतीत होता है कि किसी दिन कोई बड़ी घटना मीडिया की सुर्खियां बने तभी सबकी आंखें शायद खुलेंगी।।

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