Home मुख्य आसमान में छाये बादलों के बीच लोगों ने कहा- अलविदा माह-ए-रमजान। Voice of Darbhanga
मुख्य - June 8, 2018

आसमान में छाये बादलों के बीच लोगों ने कहा- अलविदा माह-ए-रमजान। Voice of Darbhanga

दरभंगा: आसमान में छाये बादलों के बीच शुक्रवार को हजारों नमाजियों ने एक साथ अल्लाह की इबादत में सिर झुकाया. अलविदा जुमे की नमाज अदा करने के लिए शहर की मस्जिदों में नमाजियों का हुजूम उमड़ पड़ा. बुजुर्ग हो या जवान, हर किसी ने अलविदा की नमाज अदा की और सजदा कर खुदा का शुक्र अदा किया, तो बाद में नमाजियों ने देश की तरक्की के लिए अपने हाथ बुलंद कर दुआएं मांगीं. शुक्रवार को शहर की सबसे बड़ी अलविदा की जमात लहेरियासराय स्थित जामा मस्जिद में अदा कराई गई. जुमे की नमाज में अपनी जगह बनाने के लिए समय से पहले से ही मस्जिदों में नमाजियों के आने का सिलसिला शुरू हो गया. इम्माम के अल्लाह हो अकबर कहते ही जमात में पीछे खड़े हजारों की संख्या में नमाजी एक साथ खड़े हो गए. नमाज से पहले मौलाना ने अपने खुतबे में इस पाक महीने की फजीलत बयां की. मौलाना ने कहा कि रमजान का महीना इंसान के लिए एक ट्रेनिंग है, ताकि इंसान तीस दिन रोजा रखकर खुद को गुनाहों से दूर कर सके. इस एक महीने में जैसे वह रहता है. ठीक उसी तरह साल के बाकी ग्यारह महीने इन नेकियों पर अमल करे और लोगों के काम आये. इन नेकियों को रमजान बाद भी इंसान अपनी जिंदगी में शामिल रखे, यही इस महीने का असली मकसद है. मौलाना ने कहा कि ईद में अपनी खुशी के साथ गरीबों की खुशी का भी ख्याल रखना चाहिए. इसके अलावा शहर के मुख्तलिफ मस्जिदों में भी अलविदा कितने मारे अदा की गई. जामा मस्जिद, दरभंगा टावर, मुफ्ती मुहल्ला, करमगंज, दुमदुमा, झगड़ौआ, मस्जिद बेता समेत अधिकांश मस्जिदों में नमाजियों की भारी भीड़ देखी गई. नमाज से पहले खुतबे में मौलाना ने ईद का चांद होते ही गरीबों को उनका हक सदका-ए-फित्र पहुंचाने की लोगों से अपील की. उन्होंने कहा कि जिस तरह रमजान में रोजा रखकर एक-दूसरे की भूख-प्यास का एहसास रहता है. उसी तरह ईद की खुशियों से कोई महरूम न रहे. इसका भी हमको ख्याल रखना है. सदका-ए-फित्र निकालने के साथ ज्यादा से ज्यादा खैरात करें, ताकि गरीब भी ईद का त्योहार मना सके. नमाज अदा करने वालों की भीड़ सड़क तक रही. मौलाना ने कहा कि माह-ए-मुबारक अपने अंतिम पड़ाव में दाखिल हो चुका है. बचे इन पाक दिनों में अपने गुनाहों की माफी के साथ ज्यादा से ज्यादा नेकियां करें. क्योंकि इन दिनों जो अपनी मगफिरत नहीं करा सका, सालभर उसको यह मौका नहीं मिलेगा. अलविदा जुमे के मौके पर जिला प्रशासन की ओर से सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए थे. 29 का चांद न होने पर, अगला जुमा भी अलविदा कि नमाज होगी. 29 रमजान (14 जून ) को ईद-उल-फित्र का चांद देखा जाएगा. 29 का चांद न होने पर 15 जून शुक्रवार को फिर मस्जिदों में अलविदा जुमे की नमाज अदा होगी. साथ ही 15 जून को चांद रात होगी और 30 का चांद मानकर 16 जून को ईद-उल-फित्र का त्योहार मनाया जाएगा.

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