Home मुख्य अजय पासवान एवं जगदीश साह का भाजपा से वनवास खत्म होना कहीं कोई नया संकेत तो नही! Voice of Darbhanga
मुख्य - विशेष - June 12, 2018

अजय पासवान एवं जगदीश साह का भाजपा से वनवास खत्म होना कहीं कोई नया संकेत तो नही! Voice of Darbhanga

दरभंगा: करीब तीन वर्षों के वनवास के बाद भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष जगदीश साह एवं पूर्व महापौर अजय पासवान सहित पांच भाजपा नेताओं की घर वापसी मंगलवार को हो गयी है। भाजपा के जिला मीडिया प्रभारी अमलेश झा द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय के निर्देशानुसार विगत विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी से निलंबित भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष जगदीश साह, पूर्व महापौर अजय पासवान, , पूर्व जिलामंत्री अनिल झा, पूर्व हायाघाट मण्डल अध्यक्ष हेमचंद्र सिंह एवं पूर्व अलीनगर मंडल अध्यक्ष मदन झा का निलंबन निरस्त करते हुए उन्हें पार्टी में वापस लिया गया है।
निलंबन वापसी पर जिलाध्यक्ष हरि सहनी, अशोक नायक, अमलेश झा, अभय झा, संजीव साह, राजेश रंजन, आदित्य नारायण चौधरी मन्ना, विजय चौधरी, मुकुंद चौधरी, संतोष पासवान, अमित झा, रामाशंकर ठाकुर, मीणा झा, धर्मशीला गुप्ता, रेखा झा, राम पदारथ ठाकुर, रिंकू राम, विकास चौधरी आदि ने हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि इनके वापसी से संगठन और मजबूत होगा।
ज्ञात हो कि इन नेताओं पर आरोप पार्टी विरोधी का लगाकर निलंबित करवाया गया था परंतु जगजाहिर है कि दरभंगा में भाजपा के कद्दावर प्रतिनिधि के प्रभुत्व को चुनौती देने के कारण ही प्रतिनिधि द्वारा प्रदेश में अपने आका के प्रभुत्व का उपयोग करते हुए निलंबन करवाया जाना चर्चा का विषय बना था। परंतु नये प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय के आने के बाद से ही इनके वापसी के संकेत मिलने शुरू हो गए थे। उन्होंने असंतुष्ट से बात भी की थी और सही जानकारी खुद ली। पार्टी सूत्रों की माने तो उन्हें भी पता चल गया था कि ये लोग भाजपा विरोधी नही, बल्कि प्रतिनिधि विशेष के क्रियाकलापों से असंतुष्ट थे।
इन नेताओं की वापसी ने निश्चित रूप से आने वाले विधानसभा चुनाव केलिए कुछ नए संकेत दिए हैं और प्रतिनिधि विशेष के घटते प्रभाव पर भी कहीं न कहीं एक करारा प्रहार इसे माना जा रहा है। पार्टी में वापसी पर जिला भाजपा द्वारा जारी प्रेस रिलीज में भी हर्ष व्यक्त करने वालो का नाम देखा जाय तो निलंबित करवाने केलिए जिम्मेवार माने जाने वाले प्रतिनिधि विशेष या उनके खेमे विशेष के लोगो का नाम न होना भी यही संदेश देता लग रहा है। परिणाम चाहे जो हो, परंतु अभीतक प्रभुत्व जमाये रखने वाले प्रतिनिधि को इस निलंबन से एक जोरदार झटका तो जरूर लगा है।

Share

Leave a Reply