
दरभंगा शहरी और जाले विधानसभा सीट पर मूल वैश्य का हक: अशोक नायक। Voice of Darbhanga

दरभंगा: दरभंगा शहरी और जाले विधानसभा की सीट पर मूल वैश्य समाज का दावा बनता है क्योंकि यहां 50 से 60 प्रतिशत आबादी वैश्य समाज की है। जबतक समाज संगठित नही होगा, कोई राजनीतिक दल नही पूछेगा। आज शोषित और वंचित सूरी जाति को अतिपिछड़ा वर्ग में शामिल कराने केलिए जोरदार लड़ाई लड़नी होगी।
उपरोक्त बातें शुक्रवार को वैश्य सूड़ी समाज दरभंगा के द्वारा वैश्य समाज के वयोवृद्ध नेता जगदीश साह का भाजपा में पुणः वापसी पर राजेश पूर्वे जी के आवास पर आयोजित अभिनंदन कार्यक्रम के दौरान वैश्य महासभा के महानगर अध्यक्ष सह भाजपा जिला उपाध्यक्ष अशोक नायक ने कही। समारोह में वैश्य महासभा के महानगर अध्यक्ष अशोक नायक का भी अभिनंदन किया गया। वैश्य सुड़ी समाज दरभंगा के महासचिव विक्रांत पंजियार, कृष्णदेव पूर्वे, सचिव अमित महथा, संजय महतो, कोषाध्यक्ष सुनील गड़ाई, मिडिया प्रभारी जयकिशुन राउत, शमनोज नायक एवं समाज के दिनेश महासेठ, जयंत पंजियार, अजीत महतो, राजेश पूर्वे एवं कई गणमान्य लोग भी कार्यक्रम के दौरान उपस्थित थे।
इस अवसर पर जगदीश साह ने कहा कि वैश्य समाज के विकास हेतु व्यवसाय के साथ साथ राजनीति भी जरुरी हैं। आप संगठन को वार्ड से लेकर पंचायत तक मजबूत करें और समाज के बीच राजनीतिक चेतना जगाने की भी आवश्यकता हैं। हम सब सभी जातिओं का सम्मान करते हैं लेकिन अपने समाज के विकास और सम्मान के लिए आवाज उठाते हैं। आज वैश्य समाज के राजनितिक अधिकार का अतिक्रमण हुआ हैं, आप नौजवान आगे
आये और गोलबंद होकर अतिक्रमण को मुक्त कराएं। वैश्य समाज राजनीति क्षेत्र में आखरी पायदान पर खड़ा हैं।
ज्ञात हो कि गत विधानसभा चुनाव के दौरान वैश्य महासभा द्वारा मारवाड़ी समुदाय को वैश्य मानने से इंकार करने की खबर भी चर्चा में थी। राजनीतिक विश्लेषक का कहना था कि मारवाड़ एक समुदाय है जिसमे विभिन्न जातियाँ होती है। इसी बात को लेकर बार बार वैश्य कोटे पर मात्र दो से ढाई हजार वोटरों की संख्या वाले मारवाड़ समुदाय के प्रतिनिधि द्वारा टिकट का अतिक्रमण करने का विरोध हुआ था और वैश्य समुदाय की अपेक्षा के मुद्दे पर भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष जगदीश साह निर्दलीय चुनाव लड़ गए थे। इसी कारण श्री साह सहित उनके समर्थकों को पार्टी ने निलंबित किया था जिन सभी को हाल में वापस लिया गया है। परंतु आज के व्यक्तव्य से पुनः वैश्य समाज के अधिकार की लड़ाई का शंखनाद कहीं न कहीं होता दिखाई जरूर पड़ा है और यदि मुद्दे ने जोर पकड़ा तो आने वाले दिनों में मारवाड़ समुदाय से आने वाले नगर विधायक संजय सरावगी की मुसीबतें भी बढ़ सकती हैं।

