
सोशल मीडिया की मुहीम और अमरनाथ गामी की पहल पर रामबाग से फिर खदेड़े गये भूमाफिया। Voice of Darbhanga

दरभंगा: बुधवार से राजकिले के रामबाग परिसर में कंकाली मन्दिर के सामने वाली दीवार को भूमाफियाओं द्वारा तोड़े जाने का मुद्दा सोशल मीडिया एक्टिविस्ट अभिषेक कुमार द्वारा उठाने एवं जदयू विधायक सह प्रश्न एवं ध्यानाकर्षण समिति के सभापति अमरनाथ गामी के सक्रिय संज्ञान के बाद गुरुवार को रूक गया। श्री गामी द्वारा एसएसपी मनोज कुमार को फोन पर सारी जानकारी देने के बाद उनके द्वारा विश्विद्यालय एवं नगर थाना को संयुक्त रूप से भेजा गया। तब भूमाफियाओं की टीम मैदान छोड़ भाग निकली। बार बार ऐसे कारस्तानी को देख आज श्री गामी ने सभी वर्गों के बुद्धिजीवियों के संयुक्त कमिटी का गठन कर 2 जुलाई सोमवार को लहेरियासराय स्थित धरनास्थल पर शाम चार बजे “ऐतिहासिक धरोहर बचाओ मंच” बनाकर उसी समय एक ज्ञापन जिला प्रशासन के माध्यम से सौपने की भी घोषणा की है।
ज्ञात हो कि दरभंगा के ऐतिहासिक धरोहर राजकिले पर पिछले करीब 15 वर्षो से भूमाफियाओं की बुरी नजर पड़ी है और प्रशासनिक एवं प्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण ऐतिहासिक धरोहरों को क्षत विक्षत किया जाता है एवं बेचा जाता है। कई तालाब और नहर भर दिये गए। शहर एवं जिले के किसी जिम्मेवार प्रतिनिधि न पहले आवाज उठाई न आज। परंतु एक नाम ही हर बार सामने आता है प्रतिनिधि का जिन्होंने समय समय पर धरोहरों केलिए आवाज उठाई है। जदयू के हायाघाट विधायक सह प्रश्न एवं ध्यानाकर्षण समिति के सभापति अमरनाथ गामी ने गत 12 जनवरी 2018 को भी तमाम कागजातों के साथ दरभंगा के आयुक्त एवं प्रशासनिक पदाधिकारियों को पत्र लिखा था। जिसके बाद परिसर में तालाब भराई का काम रुका था।
ताजा मामले को उजागर करने में सक्रिय भूमिका निभाने वाले माँ कंकाली के भक्त शम्भू चौधरी ने बताया कि बार बार इस प्रकार का दुःसाहस इसलिए किया जाता है क्योंकि काम तो रुकवा दिया जाता है, पर भूमाफियाओं
को चिन्हित कर कारवाई नही की जाती है। कारवाई होने पर ही ऐसा दुःसाहस करने वालो में खौफ होगा।
पूर्व के मामलों की जानकारी साझा करते हुए रामबाग संरक्षण एवं संवर्धन ट्रस्ट के सचिव हरेकान्त चौधरी बताते हैं कि महारानी का विल कोर्ट में जमा है जिसमे स्पष्ट तौर पर उधृत है कि राजपरिवार के उत्तराधिकारी परिसर का निजी उपयोग कर सकते हैं किंतु बेच नही सकते, इसलिए रजिस्ट्री होने के बाबजूद किसी का दाखिल खारिज आजतक नही हुआ। साथ ही साथ 2010 में पुरातत्व विभाग द्वारा किला एवं दीवारों का अधिग्रहण किया जा चुका है जिसकी पुष्टि आज सांसद कीर्ति आजाद महोदय ने भी सोशल मीडिया के पोस्ट पर कमेंट करते हुए लिखा है कि डीएम साहब ने उन्हें कहा है कि दीवारों का अधिग्रहण पुरातत्व विभाग कर चुका है।
पूर्व में दिसम्बर 2017 में रामबाग संरक्षण एवं संवर्धन ट्रस्ट के सचिव श्री चौधरी ने सोशल मीडिया एक्टिविस्ट अभिषेक कुमार से सारे कागजातों के साथ संर्पक किया जिसके बाद मामला हाईलाइट हुआ। उस समय नहर को भरा जा रहा था। सोशल मीडिया में मामला उछलने के बाद प्रश्न एवं ध्यानाकर्षण समिति के सभापति अमरनाथ गामी ने अभिषेक कुमार से संर्पक किया। उन्हें सारा पेपर उपलब्ध करवाया गया। सारे कागजात के साथ उन्होंने 12 जनवरी 2018 को आयुक्त दरभंगा को चिट्ठी लिखी
जिसकी प्रतिलिपि डीएम, एसएसपी, कला-संस्कृति मंत्री के सचिव, पुरातत्व विभाग को लिखा। डीएम के संज्ञान के बाद तत्कालीन डीएसपी दिलनवाज अहमद ने विश्विद्यालय थाना को आदेश दिया कि अविलम्ब काम रुकवाया जाय तथा भूमाफियाओं को चिन्हित कर प्राथमिकी दर्ज कर प्राथमिकी संख्या से उन्हें अवगत करवाया जाए। इसके बाद पुलिस ने अगले दिन ही पहुँच कर काम रुकवाया था। कुछ ट्रैक्टर को भी पकड़ा था पर छोड़ दिया। पुनः करीब 6 महीने बाद बुधवार को स्थानीय लोगों ने सोशल मीडिया एक्टिविस्ट अभिषेक कुमार को कंकाली मन्दिर के सामने वाली दीवार तोड़े जाने की सूचना दी जिसे अभिषेक कुमार के द्वारा सोशल मीडिया में तस्वीरों के साथ लिखा गया। लिखते ही बीती रात ही करीब 250 से 300 लोगों ने शेयर कर वायरल कर दिया। इसपर एसएसपी मनोज कुमार ने भी संज्ञान लिया। पुनः अहले सुबह अमरनाथ गामी द्वारा अभिषेक कुमार से अधतन जानकारी लेकर एसएसपी से बात कर उन्हें पूरी बात बताई गई। तत्पश्चात टाउन एवं यूनिवर्सिटी थाना द्वारा जाकर काम रुकवाया गया। सभी मजदूर काम छोड़ भाग गए। सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से धरोहर की रक्षा केलिए श्री गामी ने आंदोलन की घोषणा आज कर दी है।

