
तो क्या तथ्यों पर नही, राजपरिवार के वंशज का पक्ष लेकर सीओ ने रामबाग मामले में बनायी रिपोर्ट! Voice of Darbhanga

दरभंगा: ऐतिहासिक राज किला परिसर में दीवार तोड़ने व जलाशयोंं को भरने के मामले को तूल पकड़ने के बाद डीएम व एसएसपी के निर्देश पर सदर सीओ राकेश कुमार ने वहां का निरीक्षण करने के बाद अपनी रिपोर्ट भेज दी है। विश्वविद्यालय थानाध्यक्ष अजय कुमार झा के साथ वहां पहुंचकर उन्होंने दरभंगा महाराज के वंशज कपिलेश्वर सिंह से पूछताछ करने के बाद रिपोर्ट तैयार की। जलाशय को भरे जाने व दीवार तोड़ने को भू माफियों की करतूत बताते हुए जदयू विधायक अमरनाथ गामी ने सोमवार को प्रदर्शन करने की घोषणा की है। मामले को उच्च अधिकारियों के पास विधायक की ओर से उठाये जाने के बाद प्रशासन हरकत में आया था। एसएसपी ने राज किला के अंदर चल रहे कार्य पर रोक लगाते हुए जांच का आदेश दिया था। डीएम ने भी मामले की जांच की रिपोर्ट मांगी थी।
सूत्रों के अनुसार सदर सीओ राकेश कुमार ने दरभंगा महाराज के वंशज कपिलेश्वर सिंह से उनका पक्ष जाना था। उनका पक्ष जानने के बाद रिपोर्ट तैयार की गई। सूत्रों के अनुसार रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि पूछताछ के दौरान श्री सिंह ने जानकारी दी कि उक्त भूमि उन्हें फैमिली सेटेलमेंट के माध्यम से प्राप्त हुई है। हाई कोर्ट के निर्णय के अनुसार परिवार का ही कोई सदस्य जमीन को लेकर किसी प्रकार की आपत्ति जता सकता है। पुरातत्व विभाग की ओर से राज किले की बाहरी दीवार का अधिग्रहण किया गया है। रास्ते के निर्माण के लिए उनके प्रतिनिधि अमरकांत झा परिसर के अंदर की दीवार तुड़वा रहे थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि महाराजा के वंशज ने कहा है कि सरकार अगर जमीन का अधिग्रहण करना चाहती है तो उसके एवज में उन्हें उचित मुआवजा दिया जाय। इसके अलावा रिपोर्ट में कई अन्य बिंदुओं पर चर्चा की गई है। अब लोगों की निगाहें डीएम व एसएसपी पर टिकी हैं। रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद क्या कार्रवाई होती है इसका निर्णय अब डीएम को करना है।
गौरतलब है कि राज किले के अंदर की दीवार तोड़ी जाने व जलाशयों को भरने के मामले को जदयू विधायक
अमरनाथ गामी ने गंभीरता से लेते हुए आंदोलन की चेतावनी दी थी। इस सिलसिले में उन्होंने आयुक्त को भी पत्र लिखकर मामले की जांच कराने का अनुरोध किया था। श्री गामी की मांग पर डीएम ने जांच का निर्देश दिया था।
गौरतलब है कि जलाशय निजी हो या सार्वजनिक, ग्लोबल वार्मिंग को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट का सख्त निर्देश है कि उन्हें भरा नही जा सकता। ऐसे में स्वीकारोक्ति के बाद भी राजपरिवार के वंशज एवं मैनेजर पर मुकदमा दर्ज होगा या नही, यह देखने वाली बात होगी। सूत्रों के अनुसार महाराज का विल भी बना हुआ है जिसे एक केस के दौरान कोर्ट में पेश किया गया था तब बात खुली थी कि इसे बेचा नही जा सकता। यही कारण है कि रामबाग की जमीन का म्यूटेशन भी रुका हुआ था। यदि म्यूटेशन रुका
तो उसका कारण भी सीओ को जरूर उल्लेखित करना चाहिए ताकि सत्य सामने आये जनता के। बताते चलें कि सदर सीओ द्वारा ही कर्मचारी की रिपोर्ट पर विश्विद्यालय थाना को एक रिपोर्ट दी गयी थी जिसमें जलाशय को भरा जाना सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अवहेलना बतायी गया और अविलम्ब रुकवाने को कहा गया था। अब यदि सीओ की रिपोर्ट सही थी भरवाने वाले का नाम सामने आने पर उनपर मुकदमा होगा या नही, यह भी देखने वाली बात है।

