Home मुख्य बड़ी लापरवाही: पासवर्ड पता नही होने के कारण मिथिला विवि नही कर पाया नैक मूल्यांकन के लिए आवेदन! Voice of Darbhanga
मुख्य - विशेष - July 16, 2018

बड़ी लापरवाही: पासवर्ड पता नही होने के कारण मिथिला विवि नही कर पाया नैक मूल्यांकन के लिए आवेदन! Voice of Darbhanga

दरभंगा। बलवीर चौधरी
ललित नारायण मिथिला विश्विद्यालय में लापरवाही और लापरवाही के कारण आर्थिक एवं छवि का नुकसान कोई नही बात नही रही है। पर इसबार जो मामला सामने आ रहा है, बड़ा चौकाने वाला है। इस लापरवाही के कारण अब मिथिला यूनिवर्सिटी का 2020 से पहले नैक मूल्यांकन नहीं हो सकेगा।
विश्विद्यालय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक समय से पहले अंक वृद्धि के लिए कुलपति प्रो. एसके सिंह ने बड़े ही उत्साह के साथ इस बात की घोषणा की थी। लेकिन, अब इस पर पानी फिरता नजर आ रहा है। क्योंकि, समय पर इसके लिए आवेदन नहीं हो सका। यूजीसी के नए प्रावधान के हिसाब से अब 2.50 से अधिक सीजीपीए अंक पड़ने पर ही किसी शैक्षणिक संस्थान को रूसा आदि से आर्थिक लाभ मिल सकता है। इसी को दृष्टिकोण में रखकर वीसी ने समय से पहले विवि का नैक मूल्यांकन कराने की बात कही थी। इस विवि का नैक मूल्यांकन जून 2015 में हुआ था। जिसमें इसको मात्र 2.46 सीजीपीए अंक मिला था। यूजीसी नियम के मुताबिक नैक मूल्यांकन के एक साल बाद और तीन साल से पहले ही पुन: मूल्यांकन के लिए कोई शैक्षणिक संस्थान आवेदन कर सकता है। इधर, 24 जून को लनामिविवि के नैक मूल्यांकन का तीन साल खत्म हो गया। लेकिन, इसके लिए विवि की ओर से ऑन लाइन अप्लाई नहीं हो सका। इसके पीछे के कारण तो और भी अधिक दिलचस्प है। जानकारों का कहना है कि एक तो अंतिम समय में इसके लिए विवि ने प्रयास किया। फिर आवेदन के लिए इसके यूजर आइडी का पासवर्ड ही नहीं मिल सका। यूजीसी के कंप्यूटर ने ऑनलाइन आवेदन को स्वीकार ही नहीं किया। हालांकि, इसके लिए अंतिम समय में वीसी सहित कई पदाधिकारी अथक प्रयास भी किए। फिर भी इसमें सफलता नहीं मिल सकी। अब सवाल ये है कि इतने महत्वपूर्ण कार्य यूजर आइडी का पासवर्ड किस कर्मी या पदाधिकारी के पास था, विवि प्रशासन उन्हें क्यों नहीं चिन्हित नही कर सका। लोग चाहते हैं कि ऐसे व्यक्ति को चिन्हित कर उनपर कार्रवाई करने की जरूरत है। क्योंकि, ऐसे लोगों के कारण ही विवि को चाह कर भी मूल्यांकन कराने में सफलता नहीं मिल सकी है।

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