
वर्षो से बंद पड़े आयुर्वेदिक कॉलेजों के फिर से शुरू होने की जगी उम्मीद! Voice of Darbhanga

दरभंगा। बलबीर चौधरी
बिहार में आयुर्वेद शिक्षा की बदहाली के बड़ा उदाहरण के रूप में देखा जा सकता है दरभंगा का राजकीय महारानी रामेश्वरी भारतीय चिकित्सा विज्ञान संस्थान। दरभंगा राज की ओर से दिए गए दान से 15 सितम्बर 1975 को स्थापित हुआ और वर्ष 2004 में राज्य सरकार की उदासीनता के कारण सीसीआई के 11 मानको को पूरा नही कर पाने के बाद इस आयुर्वेद कालेज में नामांकन बंद हो गया। हांलांकि सूबे के स्वास्थ मंत्री मंगल पांडेय के निरक्षण के बाद इस आयुर्वेदिक कॉलेज के फिर से खुलने की आशा लोगो में जगी है।
निरीक्षण के क्रम में मंत्री श्री पांडे ने कहा कि सूबे में बंद पड़े सभी चारों आयुर्वेदिक कॉलेजों को पुन: चालू किया जाएगा। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने प्रक्रिया शुरू कर दी है। आयुष मंत्रालय के साथ भी कॉलेजों को चालू करने के लिए कई बैठकें की गई हैं।
दरअसल दरभंगा का राजकीय महारानी रामेश्वरी चिकित्सा विज्ञान संस्थान कभी अपनी भव्यता और उत्कृष्ट शिक्षा पर गर्व करता था। इसकी भव्यता इसी से अंदाज लगाया जा सकता है की यह संस्थान 20 बीघा 11 कट्ठा 2 धूर में स्थापित है। 1985 में यह कालेज बिहार सरकार के नियंत्रण में चला गया और सरकार की उदासीनता के कारण इसकी स्थिति ख़राब होती चली गयी । कभी छात्रों से भरा रहने वाला यह कालेज पिछले चौदह वर्षों से अपने अच्छे दिन के लिए तरस रहा है। आयुर्वेद कालेज को मान्यता देनी वाली सी सी आई ने वर्ष 2004 में नामांकन पर रोक लगाते हुए, कहा की जब तक कालेज इन 11 मानको को पूरा नही करता तब तक नमांकन बंद रहेगा। जिसमे कम से कम 85 शिक्षक और कर्मी, आयुर्वेदिक पोधशाला, 100 बेड का अपना अस्पताल सबसे प्रमुख शर्ते थी। जिस शर्तो को यह संस्थान पूरा नही कर सका और इसके नमांकन पर रोक लगा दी। फिलहाल कालेज के पास कुल मिलाकर 16 कर्मी, जिसमे से 4 डॉक्टर है। वही आयुर्वेद हॉस्पिटल की स्थिति भी बेहतर नही है, संसाधनों और कर्मी के कमी के कारण मरीज को ओपीडी में इलाज कर छोड़ दिया जाता है। वही कालेज में छात्रों को नही रहने के कारण आयुर्वेदिक पौधशाला के नाम पर कुछ पुराने पेड़ और झाड़ी बचे है । कालेज प्रशासन पिछले 14 सालो से जरुरी मापदंडो के लिए सरकार को पत्र लिख रही है, लेकिन अबतक किसी प्रकार की पहल नही हुई है। हांलाकि दरभंगा दौरे पर पहुंचे बिहार सरकार के स्वास्थ मंत्री मंगल पांडेय ने सारामोहनपुर स्थित आयुर्वेदिक कॉलेज का निरीक्षण करने के बाद मिडिया से
बात करते हुए कहा की सूबे में बंद पड़े सभी चारों आयुर्वेदिक कॉलेजों को पुन: चालू किया जाएगा। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने प्रक्रिया शुरू कर दी है। आयुष मंत्रालय के साथ भी कॉलेजों को चालू करने के लिए कई बैठकें की गई हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि दरभंगा के आयुर्वेदिक कॉलेज को चालू करने के लिए खामियों को दूर करने, आधारभूत संरचना को मजबूत करने व फैकल्टी की बहाली के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।

