
संगीत एवं नाट्य विभाग में आयोजित कार्यक्रम में बतायी गयी थिएटर एजुकेशन की महत्ता। Voice of Darbhanga

दरभंगा: लनामिविवि के संगीत एवं नाट्य विभाग, ललित कला संकाय में गुरुवार को दो सत्रों में कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें पहले सत्र में नाट्य विषय के दो विद्वान विशेष डॉ. शांतनु दास, नाट्य विभाग, रविन्द्र भारती विश्वविद्यालय, कोलकाता का सोदाहरण- व्याख्यान हुआ। उन्होंने थिएटर एजुकेशन की महत्ता पर प्रकाश डालते इसकी आवश्यकता संस्थानों की इसमें क्या भूमिका की विस्तार से चर्चा की। कहा कि राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय सहित दूसरे संस्थानों और विभागों ने भारत में रंगमंच में बढावा देने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इन संस्थानों से निकले छात्रों ने ट्रे¨नग से प्राप्त शिक्षा के साथ देश भर में नाट्य आन्दोलन को बढ़ाने में सहायता की है। विश्वभारती शांतिनिकेतन के शिक्षक डॉ. मृत्युंजय प्रभाकर ने आधुनिक भारतीय रंगमंच की जातीय रंगमंच की धारा के निर्माण और उससे जुड़ी सांस्कृतिक नीति पर अपना व्याख्यान दिया। इस सत्र का संचालन डॉ. सुनील कुमार ठाकुर, हेमेंद्र कुमार लाभ ने किया। दूसरे सत्र में प्रदर्शन कला विभाग, केंद्रीय विश्वविद्यालय, रांची के डॉ. जया शाही का शास्त्रीय गायन का कार्यक्रम हुआ। इनके साथ तबला पर शिव नारायण महतो, हारमोनियम पर सुजीत कुमार दूबे, तानपूरा पर श्री अन्नपूर्णा ने संगति की। विभागाध्यक्षा प्रो.लावण्य कीर्ति सिंह काव्या ने स्वागत संबोधन एवं धन्यवाद ज्ञापन प्रो. पुष्पम नारायण ने किया।

