
काशी जाने का पुण्य मिलता है दरभंगा राज परिसर स्थित प्राचीन शिव मन्दिर में अर्चना से। Voice of Darbhanga

दरभंगा: सोमवार सुबह से ही यह शिवालय श्रद्धालुओं के बम भोले के नारों से गुंजायमान हो उठा। दरअसल, सावन के सोमवारी के दिन शिवलिंग पर जल चढ़ाने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। माना जाता है कि सर्वप्रथम महर्षि परशुराम ने कांवड़ से जल लेकर भगवान शिव को अर्पित किया था। इस दिन शिवलिंग पर जल चढ़ाने से मानव पापमुक्त हो जाता है और हजारों यज्ञों के समान पुण्य कमाता है। भक्तो का मानना है की यहां अर्चना कर शिव भक्त, काशी विश्वनाथ के दर्शन का फल पाते है।
दरअसल यह शिव मंदिर दरभंगा राज परिवार की श्मशान भूमि पर बना हुआ है। इसका निर्माण महाराज माधव सिंह ने करवाया था। इस कारण इस परिसर को लोग
औढ़रदानी माधवेश्वरनाथ के नाम से संबोधित करते है। त्रिशूल युक्त कलश से शोभित सफेद गुंबद के निचे गर्भगृह में भगवान शिव प्रतिष्ठित है। यह इस परिसर का सबसे प्राचीन मंदिर है।
लोगों का मानना है की महाराज माधव सिंह ने इस शिवालय का निर्माण तकरीबन 225 साल पहले करवाया था। ऐसी मान्यता है की मिथिलांचल के लोग पहले जीवन के अंतिम समय में काशी जाते थे। इसी को देखते हुए महाराज माधव सिंह ने इस मंदिर का निर्माण कराया था। उनका मानना था की जो व्यक्ति किसी कारणवश काशी नहीं जा सके तो उन्हें यही फल प्राप्त हो।

