
संगीत एवं नाट्य विभाग के छात्रों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमो ने मोहा दर्शकों का मन। Voice of Darbhanga

दरभंगा: ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के 46वें स्थापना दिवस समारोह के तीसरे दिन रविवार की सायंकालीन सत्र में विश्वविद्यालय संगीत एवं नाट्य विभाग के छात्र- छात्राओं ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया। जिसका शुभारम्भ विद्यापति रचित महेशवाणी आगे माई जोगिया मोर जगत सुख दायक.. के मधुर गायन से हुआ। इसके बाद स्नातकोत्तर संगीत के छात्र धीरज कुमार एवं राजन कुमार ने गजल प्रस्तुत कर श्रोताओं से खूब ताली बटोरी। सावन के महीने में कजरी के शब्दों में Þबीरन भैया अइहें अलवैया हो गवनवा ना जइबो ननदी तथा अम्मा मोरे बाबा को भेजो जी को लेकर आईं – प्रियाराज, पूजा, गुड़िया, अन्नपूर्णा, कंचन, बबली एवं शारदा। गायन में तबला पर संगत कर रहे थे शिव नारायण महतो एवं दीपक कुमार। नाल पर संगत पंकज
कुमार तथा बांसुरी पर डॉ. वेद प्रकाश ने संगति की। कजरी की इस मोहक प्रस्तुति के बाद कथक नृत्य का सुंदर कार्यक्रम हुआ जिसकी नृत्यांगनाएं थीं अनिता, अंकिता, नीतू एवं अन्नू। सुजीत कुमार के भजन की प्रस्तुति के बाद सृष्टि फाउंडेशन के कलाकार स्वर्णम उपाध्याय, कोमल मांझी और ऋचा भारती ने ओडिसी नृत्य- शैली में नव दुर्गा को प्रस्तुत किया। नृत्य निदेशक पदम विभूषण गुरु केलुचरण महापात्रा और परिकल्पना हिमांशु शेखर नायक ने की। छात्राओं ने कखन हरब दुख मोर हे भोला नाथ इस नचारी गायन के बाद नाट्य विषय के छात्रों ने रोजगार शीर्षक नाटक का मंचन किया जिसके लेखक निर्देशक थे विजय कुमार साह। इससे पहले राजन और धीरज ने हम तेरे शहर में आए हैं मुसाफिर की तरह। गजल प्रस्तुत कर श्रोताओं को झुमने और ताली बजाने के लिए बाध्य कर दिया।

