
पूर्व प्रधानमंत्री केलिए विश्वविद्यालयों से लेकर महाविद्यालयों में शोकसभा का आयोजन। Voice of Darbhanga

दरभंगा : भारतरत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के प्रति श्रद्धांजलि देने के लिए विश्वविद्यालयों सहित शिक्षण संस्थानों में शोक सभा का आयोजन किया गया. ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के जुबली हॉल में कुलपति प्रो. सुरेन्द्र कुमार सिंह की अध्यक्षता में आयोजित शोकसभा में वक्ताओं ने वाजपेयी जी से जुड़े संस्मरणों की चर्चा की. कुलपति श्री सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि वाजपेयी साधारण परिवार में जन्म लेते हुए असाधारण संघर्षपूर्ण जीवन बिताते हुए राजनीति के शिखर पर पहुंचे. उनके विचार प्रेरणास्रोत हैं. प्रतिकुलपति प्रो. जय गोपाल ने कहा कि उनकी कथनी और करनी में अंतर नहीं था. वह राष्ट्रहित में निर्णय लेते थे. हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो. चंद्रभानु प्रसाद सिंह ने कहा कि उनका व्यक्तित्व विशाल था. समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. विनोद कुमार चौधरी ने कहा कि बिहार और मिथिला के प्रति उनका बहुत ज्यादा लगाव था. राजनीतिशास्त्र के प्राध्यापक डॉ. जितेन्द्र नारायण ने कहा कि उन्होंने भारतीय राजनीति परम्परा को राजनेता के रूप में जिया है. इस मौके पर कुलसचिव कर्नल निशित कुमार राय ने शोक संदेश का वाचन किया. कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय में कुलपति प्रो. सर्व नारायण झा की अध्यक्षता में शोकसभा का आयोजन किया गया. इस मौके पर दो मिनट का मौन रखा गया. वहीं विशेष पदाधिकारी डॉ. तेजनारायण झा ने शोक संवेदना का वाचन किया. मौके पर विश्वविद्यालय के पदाधिकारी व कर्मी उपस्थित थे. चंद्रधारी मिथिला विज्ञान महाविद्यालय में प्रधानाचार्य डॉ. प्रेम कुमार प्रसाद की अध्यक्षता में शोकसभा का आयोजन किया गया. जिसमें अटल बिहारी वाजपेयी के कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला गया. इस मौके पर महाविद्यालय के छात्र, शिक्षक व कर्मी उपस्थित थे. मिल्लत महाविद्यालय में प्रधानचार्य डॉ. मो. रहमतुल्लाह की अध्यक्षता में शोकसभा का आयोजन किया गया. वक्ताओं ने कहा कि भारतीय चमन का यह नयाब सितारा ईश्वर को प्यारा हो गया. इस मौके पर डॉ. मो. रिजवानुल्लाह, डॉ. भक्तिनाथ झा, डॉ. एम.पी मिश्रा, मो. अल्लाफुल हक, डॉ. अताउल रहमान, नंदकिशोर मेहरा, रमाकांत झा, डॉ. शमीम आदि ने विचार रखे.

