
डीएमसीएच में लंबे समय से खत्म है जीवनरक्षक दवाएं, अस्पताल प्रशासन ने भी खड़े किए हाथ। Voice of Darbhanga
दरभंगा: उत्तर बिहार के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान डीएमसीएच में इनदिनों जीवनरक्षक दवाओं का घोर संकट हो गया है। स्टॉक से कई जीवन रक्षक इंजेक्शन के साथ गैस व उल्टी रोकने की दवाएं भी नदारद हैं। स्थिति यह है कि जरूरी एंटीबैटिक भी अस्पताल में नहीं है। इस कारण मरीजों को जेब ढीली करनी पड़ रही है। अस्पताल अधीक्षक डॉ. राज रंजन प्रसाद ने बिहार मेडिकल स्ट्रक्चरल इन्फ्रास्ट्रक्चर कॉपोरेशन लिमिटेट (बीएमएसआईसीएल) को दवा की आपूर्ति अविलम्ब करने के लिए तीसरी बार रिमाइंडर भेजा है। बीएमएसआईसीएल से अस्पताल प्रबंधन ने दवाओं की मांग जुलाई महीने में ही की थी। अभी तक आपूर्ति नहीं होने से मरीजों के अलावा अस्पताल प्रबंधन की मुश्किलें बढ़ गई हैं। इधर मुख्य दवा भंडार के मेडिकल ऑफिसर डॉ. मनोज कुमार ने अधीक्षक से अपने स्तर से जीवन रक्षक दवा की खरीद करने का अनुरोध किया है।
डीएमसीएच के इमरजेंसी विभाग में एविल, एडनालिन, डेक्सोना, डेरीफाइलिन, टेटग्लोग, लाइजॉल जैसी दवाएं समाप्त हो चुकी हैं। सेफिक्सिन एंटीबायोटिक काफी दिनों से अस्पताल में उपलब्ध नहीं हैं। उल्टी रोकने की दवा ऑन्डेम भी कई दिनों से आउट ऑफ स्टॉक है। पारासिटामॉल भी दवा भंडार में उपलब्ध नहीं है। ए्प्रिरन व सेट्रीजिन जैसी आवश्यक दवाओं को जल्द से जल्द उपलब्ध कराने के लिए अधीक्षक ने बीएमएसआईसीएल से अनुरोध किया है। गैस की दवा भी अस्पताल में उपलब्ध नहीं है। नोजल ड्रॉप भी कई दिनों से समाप्त है। इन दवाओं सहित 28 आवश्यक दवा अविलम्ब उपलब्ध कराने की अधीक्षक ने गुहार लगाई है।
डीएमसीएच अधीक्षक डॉ. राज रंजन प्रसाद ने बताया कि दवा की आपूर्ति के लिए बीएमएसआईसीएल को जुलाई में ही आर्डर दिया गया था। दवा की आपूर्ति के लिए तीसरी बार रिमाइंडर भेजा गया है। पर कोई जवाब नही मिल पा रहा है। वे फिलहाल कुछ नही कर सकते जबतक सप्लाई नही होता।


