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मुख्य - August 27, 2018

संस्कृत सप्ताह के तीसरे दिन वेदों की उत्पत्ति पर शास्त्रार्थ। Voice of Darbhanga

दरभंगा : कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के दरबार हॉल में चल रहे संस्कृत सप्ताह समारोह के तीसरे दिन वेदों की उत्पत्ति पर लंबा शास्त्रार्थ चला. विषय था ‘वेद की पौरुषेयता- अपौरुषेयता पर विचार’ यानी कि वेद मानव द्वारा रचित है या ईश्वर कृत. शास्त्रार्थियों में पूर्व पक्ष से डॉ राजकिशोर मिश्र एवं उत्तर पक्ष से अखिलेश कुमार मिश्र थे. डॉ. राजकिशोर का मत था कि वेद पौरुषेय है न कि अपौरुषेय. उनका तर्क था कि वेद मानव रचित है. अपने समर्थन में उन्होंने काठक संहिता, तैत्रिय आदि ग्रन्थों का हवाला दिया. वहीं उत्तर पक्ष के अखिलेश का मानना था कि वेद विशुद्ध रूप से अपौरुषेय है. वेद को ईश्वर कृत मानते हुए उन्होंने इसका प्रमाण मीमांसा, न्याय, धर्मशास्त्रों, महाभारत, भगवत गीता आदि ग्रन्थों में बताया. उक्त जानकारी देते हुए पीआरओ निशिकांत ने बताया कि इसके पूर्व कुलपति प्रो. सर्व नारायण झा, प्रतिकुलपति प्रो. चन्द्रेश्वर प्रसाद सिंह , प्रो. शिवाकांत झा समेत अन्य पदाधिकारियों ने सरस्वती की चित्र पर माल्यार्पण कर काययक्रम की शुरूआत की. सरस्वती वन्दना भी हुई. इसके बाद इसी सत्र में श्लोक अन्त्याक्षरी प्रतियोगिता भी आयोजित की गई. निर्णायक मंडल में प्रो. शशिनाथ झा, डॉ. विश्राम तिवारी एवं प्रो. मीना कुमारी शामिल थे. कार्यक्रम के संयोजक थे डॉ. दिलीप कुमार झा.

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