
लोकसभा चुनाव: कीर्ति व संजय होंगे आमने-सामने या फातमी और गोपालजी में होगी टक्कर! Voice of Darbhanga

दरभंगा : क्या फिर कीर्ति और संजय आमने-सामने होंगे या फिर गोपालजी और फातमी के बीच मुकाबला होगा! जी हां, दरभंगा संसदीय सीट को लेकर यह यक्ष प्रश्न बना हुआ है। जहां तक 2019 के लोकसभा चुनाव का प्रश्न है, तो वर्तमान गठबंधन की राजनीति में यह सीट किस दल के पास जाएगा यह तय नहीं है, लेकिन पिछले चार दिनों के अंदर सुर्खियों में आई एनडीए में सीटों के समझौता की खबर के बाद राजनीतिक जोड़-तोड़ शुरू हो गई। यद्यपि उस खबर का खंडन दलों द्वारा किया जा चुका है। दरभंगा संसदीय सीट पर लगातार दो बार के साथ तीन बार कीर्ति आजद यहां का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। वहीं राजद के मो. अली अशरफ फातमी चार बार यहां का प्रतिनिधित्व किये हैं, लेकिन लगातार दो बार उन्हें हार का स्वाद चखना पड़ा है। कीर्ति आजाद भाजपा से निलंबित चल रहे हैं। यही कारण है कि उनके टिकट कटने का कयास आम लोग लगा रहे हैं। जहां तक गठबंधन की बात है, तो दरभंगा सीट महागठबंधन में राजद के पास रहेगा या फिर कांग्रेस को मिलेगा पर यह स्पष्ट नहीं है पर कीर्ति आजाद द्वारा खुले रूप से यह कहने कि वे यहीं से चुनाव लडेंÞगे और किसी राष्ट्रीय दल के टिकट पर ही। जिसके कारण राजद में फातमी के एकछत्र राज पर सवाल उठने लगे हैं। भाजपा अगर यहां से चुनाव लड़ती है, तो यहां से गोपालजी ठाकुर का नाम संगठन के गतिविधि से लोगों के जुबान पर आ रहा है। अगर गठबंधन के तहत जदयू के खाते में यह सीट जाता है, तो जदयू के राष्ट्रीय महासचिव संजय झा का नाम सामने आ रहा है, लेकिन विधायक सुनील चौधरी भी चुनाव लड़ने की मंशा जता चुके हैं। वैसे पिछले बार जदयू ने संजय झा को अपना प्रत्याशी बनाया था, लेकिन मोदी लहर में फातमी तो उड़े ही संजय झा भी तीसरे नम्बर पर चले गये। वैसे संभावना कम है, लेकिन सूत्र बताते हैं कि केन्द्र स्तर पर यह भी प्रयास हो रहे हैं कि कीर्ति अगर माफी मांग लें, तो उनका निलंबन समाप्त कर दिया जाएगा और उन्हें फिर से पार्टी का प्रत्याशी बना दिया जाएगा। सूत्र यह भी बताते हैं कि कीर्ति अपने द्वारा लगाये गये आरोपों की जांच की घोषणा की मांग पर अड़े हैं। बहरहाल ये सभी बातें अभी भविष्य के गर्भ में हैं, लेकिन यह सच्चाई है कि कीर्ति आजाद ब्राह्मण बहुल्य क्षेत्रों में जाकर लोगों से राय-मशविरा करना शुरू कर दिया है। गांवों में जाने के बाद सीधा प्रश्न लोगों से करते हैं कि मेरा दोष क्या है, मैने तो सिर्फ भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया है। कहीं उनके मनोनुकूल आश्वासन मिलता है, तो कहीं उनके मन के विपरीत आवाजें सुनाई पड़ती है। जदयू नेता संजय झा भी लोगों से सम्पर्क कर रहे हैं और पिछले छ: वर्षों में वे जो कार्य किये हैं, उसका जिक्र करते हैं और कहते हैं मै न तो एमपी और न एमएलए था। फिर भी हमने जो कार्य किया है उसका आकलन होना चाहिए। जहां तक गोपालजी का प्रश्न है, तो उनका पूंजी संगठन का कार्य और आम लोगों के बीच सम्पर्क और लोगों के दु:ख-दर्द में शामिल होना मुख्य है।

