
मिथिला विवि में शिक्षक दिवस पर दो दर्जन शिक्षकों को किया गया सम्मानित। Voice of Darbhanga

दरभंगा : ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सुरेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि व्यक्ति पूरी जिंदगी छात्र और शिक्षक रहते हैं. उसी अनुरूप अपने व्यवहार तथा कर्तव्य को निभाना चाहिए. वे आज शिक्षक दिवस के अवसर पर सामाजिक सद्भावना और राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों का अवदान विषय पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते हुए उक्त बातें कही. उन्होंने कहा कि मानव में हार नहीं मानने की क्षमता होती है. उसी को जगाने की आवश्यकता है. अगर इस क्षमता विकसित करने में मानव सफल हो गया तो वह किसी भी लक्ष्य को पूरा कर लेगा. साथ ही शिक्षक इस क्षमता का विकास कर लेते है, तो शिक्षा का सही विकास हो जाएगा. प्रो. सिंह ने कहा कि आज का दिन जहां शिक्षकों के योगदानों को रेखांकित करने का दिन है. वहीं शिक्षकों को अपने दायित्व को समझने की जरूरत का दिन है. छात्र और समाज शिक्षकों से बहुत उम्मीदें लगा रखी है, उस पर आपको खरा उतरने की जरूरत है. शिक्षा की स्थिति आज ठीक नहीं है. यह सही दिशा में नहीं जा रही है, हमें ज्ञान की गहराई को नापने की जरूरत है. शिक्षकों को ऐसा व्यवहार करना चाहिए जिससे छात्रों के बीच एक सकारात्मक संदेश मिले. समय की पुकार है कि विवेकशील और संस्कारी शिक्षा छात्रों को दी जाए. इसके अभाव में छात्र व्यक्तिवादी होते जा रहें है, जिससे समाज में सद्भावना का अभाव हो जाता है. इसके साथ ही आईसीटी को आत्मसात करने की जरूरत है. पटना विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष एन. के. चौधरी ने कहा कि शिक्षकों की आवाज बंद नहीं हो सकती है. शिक्षक समाज को संदेश देते हैं. शिक्षक दिवस के अवसर पर ही नही बल्कि हर दिन हमें राधा कृष्ण के दर्शन से प्रेरणा लेनी चाहिए. शिक्षक राष्ट्र और समाज का निर्माण ज्ञान के माध्यम से करते हैं. किसी भी शैक्षिक संस्था की पहचान उसकी भवन से नही हो सकती है बल्कि शिक्षक उसकी पहचान होते है. शिक्षक नहीं होंगे तो समाज का सही निर्माण नहीं होगा. एक समय ऐसा भी था जब शिक्षक का समाज में सम्मान राजा से अधिक होता था. आवश्यकता है हमें अपनी पुरानी पहचान स्थापित करने की. उन्होंने कहा कि मिथिला में शिक्षकों की परंपरा रही है, लेकिन आज वह कमजोर पर रहा है. इस ओर बुद्धिजीवियों को ध्यान देना होगा. ए.एन. सिन्हा इंस्टिट्यूट के पूर्व निदेशक प्रो. एन. एन. कर्ण ने कहा कि जीवन को गंभीरता से लेना चाहिए. शिक्षक राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है. शिक्षक राष्ट्र को सही दृष्टि और दिशा देते हैं. समाजशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. विनोद कुमार चौधरी ने कहा कि शिक्षकों को आज के अवसर पर आत्म मंथन और चिंतन करने की जरूरत है, तभी समाज एवं राष्ट्र का विकास होगा. प्रति कुलपति प्रो. जय गोपाल ने आगत अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि शिक्षकों को अपने दायित्व के प्रति जागरुक रहना चाहिए तभी वहां समाज का विकास होगा और शिक्षकों के सम्मान में वृद्धि होगी. धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कुलसचिव कर्नल निशीथ कुमार राय ने कहा कि शिक्षक आज कर्त्तव्यों को निभाने में पीछे हो गए है. नतीजा है कि समाज में उनके सम्मान में कमी आई है. शिक्षकों को अपनी पुरानी परंपरा को फिर से निभाने की जरूरत है. मंच संचालन डॉ. मुनेश्वर यादव ने किया. इस अवसर पर अवकाश प्राप्त 24 शिक्षकों को सम्मानित भी किया गया.

