Home मुख्य जन आंदोलन की तरह पूरे जिले में चलायें पोषण अभियान: जिलाधिकारी। Voice of Darbhanga
मुख्य - September 7, 2018

जन आंदोलन की तरह पूरे जिले में चलायें पोषण अभियान: जिलाधिकारी। Voice of Darbhanga

कुपोषण के वजह से व्यक्ति का सर्वांगीण विकास नहीं हो पाता है जिससे उसकी कार्य क्षमता घटती है । इसका दुष्परिणाम अंततः उस व्यक्ति के साथ साथ परिवार , समाज एवं देश को भी भुगतना पड़ता है। जिलाधिकारी डॉ चंद्रशेखर सिंह ने समाज कल्याण विभाग के द्वारा समाहरणालय स्थित अंबेडकर सभागार में आयोजित पोषण अभियान सम्बन्धित सेमिनार के अवसर पर उक्त बातें कहीं। उन्होंने कहा की सरकार गर्भ से लेकर बच्चा के व्यस्क होने तक पोषण संवर्धन का कार्यक्रम चला रही है । इसके बावजूद भी समाज के कई स्तरों पर शिशु एवं मातृ कुपोषण की स्थिति विद्यमान है। इसकी मूल वजह जागरूकता की कमी है। लोगों के बीच जागरूकता उत्पन्न कर इस स्थिति में सुधार लाया जा सकता है । उन्होंने कहा कि पोलियो प्रतिरक्षण कार्यक्रम की तरह अभियान चलाकर लोगों में स्वच्छता तथा सही तरीके से जीवन यापन करने के तरीके एवं पोषण कार्यक्रम की जानकारी देनी जरूरी है। उन्होंने कहा कि 0 से 6 वर्ष के बीच के बच्चों को तथा धात्री एवं गर्भवती महिलाओं को कुपोषण से मुक्त बनाना ही इस अभियान का उद्देश्य है। उपस्थित अधिकारियों से उन्होंने अनुरोध किया कि पोषण अभियान को एक जन आंदोलन की तरह जिला में चलाएं।
सेमिनार में विशेषज्ञों ने बताया कि जन्म के प्रथम घंटे में स्तनपान कराने का प्रतिशत जहां राष्ट्रीय स्तर पर 95 है, वही दरभंगा में यह मात्र 23 है । जिला के 48% बच्चे किसी न किसी वजह से कुपोषित हैं । संस्थागत प्रसव का राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिशत जहां 95 है वहां जिला में इसका प्रतिशत 47 है । अनेक तरह की कल्याणकारी एवं पोषण की योजनाओं के चलने के बावजूद भी पोषण का यह स्तर संतोषजनक नहीं है। जागरूकता एवं व्यवहार परिवर्तन के द्वारा इस में सुधार लाने के लिए यह विशेष अभियान चलाया जा रहा है।
जिलाधिकारी ने बताया कि संस्थागत प्रसव के लिए लोगों को प्रेरित करना तथा प्रसव के 1 घंटे के अंदर शिशु को स्तनपान कराना, 6 महीने तक सिर्फ मां का दूध बच्चों को देना, 6 महीने के बाद पौष्टिक पूरक आहार देने संबंधी बातों को लोगों में विशेष रूप से प्रचारित-प्रसारित करने की जरूरत है । उन्होंने कहा कि कुपोषण की शुरुआत बाल विवाह से भी होती है। इसलिए बाल विवाह की कुरीति को जड़ मूल से खत्म करने की विशेष रूप से जरूरत है । जिलाधिकारी ने सभी प्रखंड स्तरीय पदाधिकारी तथा स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ प्रखंड स्तर पर तथा आंगनबाड़ी केंद्रों पर भी पोषण से संबंधित जागरूकता कार्यशाला को आयोजित करने को कहा।
जिला प्रोग्राम पदाधिकारी ने बताया कि 1 सितंबर से 30 सितंबर तक जिला में पोषण माह आयोजित होगा। इस पूरे माह के अंतर्गत विभिन्न तरह के पोषण से संबंधित जागरूकता कार्यक्रम जिला प्रखंड एवं गांव के स्तर पर आयोजित होंगे । 10 सितंबर को जिला स्तर पर सभी विभाग के संबंधित पदाधिकारियों के साथ एक कन्वर्जेंस मीटिंग भी होगी।
11 सितंबर को जिला के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों की फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता एवं कविता पाठ का आयोजन होगा। प्रखंड स्तर पर 21 सितंबर को पोषण मेला आयोजित किया जाएगा। सितंबर महीने के चौथे सप्ताह में आंगनबाड़ी सेविका एवं आशा घर घर जाएंगी एवं महिलाओं को जागरुक करेगी। दीवार लेखन भी किया जाएगा । 28 सितंबर को आंगनबाड़ी केंद्रों के पोषक क्षेत्र में प्रभात फेरी का आयोजन होगा।
सेमिनार में यह बताया गया कि सितंबर माह को राष्ट्रीय पोषण माह के रूप में मनाया जा रहा है। इस अवसर पर गर्भवती महिलाएं, धात्री महिलाएं ,नवजात शिशु , किशोरियों आदि के स्वस्थ रहने के लिए पोषण संबंधी जानकारी दी जाएंगी।
जिलाधिकारी ने सभी सीडीपीओ एवं उपस्थित महिला पर्यवेक्षिका से कहा कि प्रखंड एवं आंगनवाड़ी केंद्र के स्तर पर होने वाले कार्यक्रम में लोगों को स्वच्छता एवं शौचालय के नियमित रूप से प्रयोग तथा स्वच्छ पेयजल के प्रयोग के प्रति भी जागरुक करें। पोषण अभियान में बेहतर कार्य करने वाले व्यक्ति को पुरस्कृत भी किया जाएगा। सेमिनार में जिलाधिकारी ने पोषण मुक्त परिवार एवं समाज बनाने के लिए शपथ भी दिलाया।सेमिनार में सहायक समाहर्ता विवेक रंजन, अनुमंडल पदाधिकारी बेनीपुर एवं बिरौल, जिला कल्याण पदाधिकारी, सिविल सर्जन, जिला प्रोग्राम पदाधिकारी समेत सभी सीडीपीओ, महिला पर्यवेक्षिका एवं अन्य संबंधित विभागों के पदाधिकारी व कर्मी उपस्थित थे।

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