Home मुख्य संस्कृत विवि में शिक्षा शास्त्री की मान्यता फिर से हुई बहाल। Voice of Darbhanga
मुख्य - September 10, 2018

संस्कृत विवि में शिक्षा शास्त्री की मान्यता फिर से हुई बहाल। Voice of Darbhanga

दरभंगा: कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के शिक्षा शास्त्री (बीएड) में पूर्व में रद्द मान्यता पर पुर्निवचार के बाद राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) की भुवनेश्वर स्थित पूर्व क्षेत्रीय कमेटी ने मान्यता फिर से बहाल कर दी है। इससे छात्रों सहित परिसर से जुड़े लोगों में हर्ष और उल्लास का माहौल व्याप्त हो गया है।
2005 में पहली बार मिली मान्यता : मालूम हो कि विश्वविद्यालय के शिक्षा शास्त्र पाठ्यक्रम को सर्वप्रथम 21 जून 2005 को एनसीटीई से मान्यता मिली थी। एनसीटीई ने 100 सीटों पर नामांकन की मंजूरी भी दी थी। तब से लगातार नामांकन होता रहा है और छात्र यहां से शिक्षा शास्त्र पास करते रहे हैं। एनसीटीई से सशर्त मान्यता मिली थी लेकिन शर्तों के समय सीमा के अंदर अनुपालन नहीं किए जाने से क्षेत्रीय कमेटी ने 23 अक्टूबर 2017 को अपनी बैठक में इसकी मान्यता को रद्द कर दिया था।
विश्वविद्यालय ने मुख्यालय में की अपील : विश्वविद्यालय ने क्षेत्रीय कमेटी के निर्णय के विरुद्ध नई दिल्ली स्थित एनसीटीई के मुख्यालय में अपील की और अपना पक्ष रखा। विश्वविद्यालय के पक्ष को सुनने के बाद मुख्यालय ने क्षेत्रीय कमेटी को मामले पर पुर्निवचार करने का आदेश दिया। मालूम हो कि विश्वविद्यालय में शिक्षा शास्त्र के लिए एनसीटीई के परिनियम 2014 के अनुरूप शिक्षकों की नियुक्ति की गई थी। इस बीच परिनियम में संशोधन कर 9 जून 2017 को पाठ्यक्रम को 2 वर्षीय कर दिया गया। इसके फलस्वरूप शिक्षकों की संख्या बढ़ाकर 15 कर दी गई जो पहले 8 थी। क्षेत्रीय कमेटी ने नए परिनियम के अनुरूप शिक्षकों की बहाली कर कुलसचिव से हस्ताक्षरित शपथ पत्र सौंपने के लिए 15 दिनों का समय दिया।
कुलपति ने दिखाई तत्परता: कुलपति के व्यक्तिगत निर्देशन में विश्वविद्यालय प्रशासन ने सक्रियता दिखाते हुए समय सीमा के अंदर विज्ञापन प्रकाशित और अंतर्वीक्षा आयोजित कर आवश्यकतानुसार शिक्षकों की नियुक्ति कर दी। इसके बाद विशेष दूत के माध्यम से शर्तों के अनुपालन संबंधी कुलसचिव से हस्ताक्षरित शपथ पत्र समय सीमा के अंदर क्षेत्रीय कमेटी को जाकर सौंप दिया। इसके बाद कमेटी की बैठक में अनावश्यक विलंब होता रहा जिसके कारण बिहार में बीएड में केंद्रीयकृत नामांकन की प्रक्रिया काफी काफी आगे निकल गई। विश्वविद्यालय परिसर से जुड़े लोगों में इस तरह का विश्वास होने लगा कि अगर मान्यता मिलती भी है तो वर्तमान सत्र में नामांकन संभव नहीं हो सकेगा। इसी बीच विश्वविद्यालय ने विवश होकर एनसीटीई के निर्णय के विरोध में हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया। हाई कोर्ट का आदेश आना अभी बांकी है और इससे पूर्व कमेटी की बैठक 31 अगस्त एवं 1 सितंबर को हुई जिसमें निर्णय कर मान्यता बहाल कर दी गई।

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