Home मुख्य पौराणिक महत्ता के कारण नवादा भगवती प्रांगण में दूर-दूर से आ रहे श्रद्धालु। Voice of Darbhanga
मुख्य - विशेष - October 16, 2018

पौराणिक महत्ता के कारण नवादा भगवती प्रांगण में दूर-दूर से आ रहे श्रद्धालु। Voice of Darbhanga

दरभंगा। बलवीर चौधरी
दरभंगा के बेनीपुर से पांच किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में नवादा गांव में अवस्थित दुर्गा-स्थान कुल 52 सिद्ध शक्तिपीठ में से एक है। शिव-पार्वती से जुड़ी इस पीठ का वर्णन देवी भागवत व मत्स्य पुराण में है। इसके अनुसार सती के वाम स्कंध यहीं पर गिरी थी।
जब सती अपने पिता के व्यवहार से क्षुब्ध होकर हवन कुंड में अपनी आहुति दे दीं तो महादेव सती के शव को कांधे पर लेकर अर्ध-विक्षिप्ततावस्था में दौरे। इसी दौरान सती की बायां कान दरभंगा के नवादा के इस स्थान पर गिरा, जहाँ आज माँ दुर्गा का भव्य स्थायी मंदिर है। यहाँ सिंहासन पर विद्यमान रूप कान के आकार में है।
कहा जाता है कि लगभग 600 वर्ष पूर्व राजा हयहट्ट द्वारा यहां माँ जगदंबा की मूर्ति स्थापना हुई। बहेड़ी प्रखंड के हावीडीह गांव के एक साधक प्रत्येक दिन साधना-आराधना के लिए आते थे। जो वृद्धावस्था में दुर्बलता के वजह से आने में सक्षम नही थे तो भगवती की प्रेरणा से सिंहासन से मूर्ति उठाकर हावीडीह ले गए, जहाँ आज भी उसी मूर्ति की पूजा की जाती है। यहां से उठाए गए भगवती की प्रतिमा और अन्य हरेक वस्तु गुप्त है। इस सिद्धि पीठ में सिर्फ सिंहासन मात्र रह गयी है जिसकी पूजा होती है। अर्थात यहाँ माँ के निरंकार रूप की पूजा होती है।
तेरहवीं शताब्दी में ही इस मंदिर को काफी प्रसिद्धि मिल गयी थी। इसीसे नवादा दुर्गा स्थान की प्राचीनता का आकलन किया जा सकता है।
वैसे तो पौराणिक महत्ता के कारण इस दुर्गा मंदिर के प्राँगण मे तो पूरे वर्ष लोगों की भीड़ लगी रहती है, लेकिन नवरात्र में यह भीड़ कई गुना बढ़ जाती है।

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