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मुख्य - November 22, 2018

मिथिला मैथिली के विकास में अटल बिहारी वाजपेयी का योगदान विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित। Voice of Darbhanga

दरभंगा: ‘मिथिला मैथिली के विकास में अटल बिहारी वाजपेयी का योगदान’ विषय पर वृहस्पतिवार को विद्यापति सेवा संस्थान दरभंगा के तत्वाधान में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित करते हुए राजनीति शास्त्र के चिंतक प्रो जितेंद्र नारायण ने कहा कि अटल जी ने सम विकास की अवधारणा को कार्यान्वित किया। उन्होंने कहा कि विकास में एकरूपता का अभाव ही वर्तमान दौर की समस्या का मूल कारण है। उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र में विकास का पैमाना होता है शिक्षा, उद्योग औरा यातायात। अटल जी ने कभी पक्षपातपूर्ण कार्य नहीं किया बल्कि सभी क्षेत्रों के विकास पर बराबर ध्यान दिया। मणिकांत झा के संयोजन में आयोजित इस संगोष्ठी का उद्घाटन दरभंगा की महापौर वैजयंती खेड़िया ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि मातृभाषा मैथिली और मिथिला यह सब शब्द सुनने से ही आत्मीयता का बोध होता है। मैथिली भाषा बहुत ही मधुर है और इसी से प्रभावित होकर अटल बिहारी बाजपेयी ने भारतीय संविधान के अष्टम अनुसूची में इस भाषा को दर्ज कराया।
विद्यापति सेवा संस्थान के महासचिव डा0 बैद्यनाथ चौधरी बैजू ने भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कृतित्व एवं व्यक्तित्व की विस्तार से चर्चा करते हुए मिथिला एवं मैथिली के विकास में अटल बिहारी वाजपेयी के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि आज यदि अटल होते तो शायद अब तक पृथक मिथिला राज्य भी बन गया होता। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाराज लक्ष्मेश्वर सिंह मेमोरियल महाविद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ विद्यानाथ झा ने की। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन मे उन्होंने कहा कि अटलजी ने मिथिला और मैथिली के लिए जो किया इसे मिथिला वासी कभी भी भूल नहीं पाएंगे । अपने संबोधन में उन्होंने बाजपेयीजी के साथ पंडित नेहरू का भी स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने ही मैथिली भाषा को साहित्य अकादमी में स्थान दिलाया था। डाॅ झा ने कहा कि हमारे देश की बहुत आबादी है हम अपने कर्मों से अपना विकास कर सकते हैं और इसके लिए हमें सरलता से कार्य करना चाहिए। बाजपेयीजी ने यहां कई आधारभूत संरचना और निर्मित की जो बुद्धिजीवी क्षेत्र होने के कारण भाषा के विकास में साफ झलक रही है।
सेमिनार में प्रतिभागियों के पढ़े गए आलेखों की संकलित पुस्तक ‘अटल आ मिथिला’ का लोकार्पण भी किया गया। इस पुस्तक में प्रवीण कुमार झा, कमलाकांत झा, प्रो रमेश झा, विष्णु देव झा विकल, कल्पना झा, सुमित गुंजन, विनोद कुमार झा सहित 2 दर्जन से अधिक आलेख संकलित किए गए हैं। वरिष्ठ कवि एवं हास्य-व्यंग्य सम्राट डा0 जयप्रकाश चौधरी जनक के संचालन मे आयोजित कार्यक्रम में शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर ओम प्रकाश, महात्मा गाँधी शिक्षण संस्थान के चेयरमैन हीरा कुमार झा, जीवकांत मिश्र, विजय कांत झा, बूढ़ा भाई आदि ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम की शुरूआत गंधर्व कुमार झा द्वारा प्रस्तुत वेद ध्वनि के साथ हुआ जबकि धन्यवाद ज्ञापन मणिकांत झा ने किया।

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