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मुख्य - November 28, 2018

बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी थे महाराजा कामेश्वर सिंह: प्रो0 झा। Voice of Darbhanga

28.11.2018
दरभंगा: महाराजा कामेश्वर सिंह बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी थे। उनके व्यक्तित्व और कृतित्व को समझने के लिए तत्कालीन सामाजिक, राजनीतिक परिस्थिति एवं परिवेश को समझना आवश्यक होगा।
ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के विश्वविद्यालय समाजशास्त्र विभाग में बुधवार को महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह मेमोरियल चेयर के तत्वावधान में आयोजित महाराजा जयंती समारोह के अवसर पर बतौर मुख्य वक्ता विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. सुरेंद्र मोहन झा ने ये बातें कहीं। उन्होंने तत्कालीन परिवेश की विस्तारपूर्वक चर्चा करते हुए कहा कि सामाजिक विकास से लोगों की चेतना जागृत और विषमता दूर होती है। उन्होंने महाराजा को सामाजिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक एवं आर्थिक परिवर्तनों का राजदूत बताया। उन्होंने महाराजा के सामाजिक सुधार के क्षेत्र में उनके अवदानों की चर्चा की और कहा कि समाज की जागृति में इससे बहुत लाभ हुआ।
मुख्य अतिथि के रूप में सामाजिक विज्ञान संकायाध्यक्ष प्रो. अनिल कुमार झा ने महाराजा के भारतीय राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान की चर्चा की और कहा कि ब्रिटीश हुकूमत के दौरान भी उन्होंने राष्ट्रभक्ति की अलख जगाई। उन्होंने कहा कि महाराजा ने गांधी दर्शन को स्वीकारा और मानव कल्याण के उद्देश्य से विकास कार्य किया। महाराजा के व्यक्तित्व एवं कृतित्व का सही मूल्यांकन करने की आवश्यकता है।
विशिष्ट अतिथि के रूप में वाणिज्य संकायाध्यक्ष प्रो. अजीत कुमार सिंह ने कहा कि महाराज महाराजाधिराज ने धर्म, अर्थ, काम में संतुलन बनाए रखा जिसके कारण देश भर में शैक्षणिक विकास को नया आधार मिला। इस मौके पर प्रो. जय शंकर झा, प्रो. अरूणिमा सिंह, प्रो. अमरनाथ झा, डॉ. एमजेड अंसारी, डॉ. श्रवण कुमार चौधरी आदि ने भी विचार व्यक्त किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विभागाध्यक्ष प्रो. विनोद कुमार चौधरी ने की। प्रो. गोपी रमण प्रसाद सिंह ने अतिथियों का स्वागत, डॉ. मंजू झा ने धन्यवाद ज्ञापन एवं डॉ. विद्या नाथ मिश्र ने कार्यक्रम का संचालन किया।

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