Home मुख्य मोहब्बत एवं तहजीब की जुबान है उर्दू : डीएम। Voice of Darbhanga
मुख्य - December 4, 2018

मोहब्बत एवं तहजीब की जुबान है उर्दू : डीएम। Voice of Darbhanga

 

04.12.2018

दरभंगा: मोहब्बत एवं तहजीब की जुबान है उर्दू। यह हमारी गंगा जमुनी संस्कृति का भी प्रतीक है । जिलाधिकारी डॉ चंद्रशेखर सिंह ने डीएमसीएच सभागार में फरोग ए उर्दू सेमिनार एवं मुशायरा के उद्घाटन के अवसर पर उक्त बातें कही। उन्होंने कहा कि आजादी की लड़ाई से लेकर देश के विकास में उर्दू सहित सभी भाषाओं का का काफी योगदान रहा है। उन्होंने आश्वासन दिया कि उर्दू में अच्छा प्रदर्शन करने वाले बच्चों को जिला प्रशासन के द्वारा प्रोत्साहित कर उनकी भी किया जाएगा ।

कार्यक्रम का विषय प्रवेश कराते हुए जिला उर्दू कोषांग के प्रभारी पदाधिकारी मो वसीम अहमद ने कहा कि उर्दू हिंदुस्तानियों की भाषा है। इसने देश को एकता के सूत्र में बांधने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है ।

कार्यक्रम में उपस्थित मौलाना आजाद उर्दू विश्वविद्यालय चंदन पट्टी के प्राचार्य डॉ अब्दुल मोकसित खान ने कहा कि उर्दू के विकास में हिंदी भाषी साहित्यकारों का उतना ही योगदान है जितना हिंदी के विकास में अमीर खुसरो एवं अन्य मुस्लिम साहित्यकारों का। इसलिये हिंदी एवं उर्दू हम सबकी भाषा है। उर्दू के विद्वान डॉ आलमगीर शबनम ने बताया कि उर्दू हिंदुस्तान में पैदा हुई और पली बढ़ी है। उन्होंने कहा कि यह देश की जुबान है। उर्दू के जानकारों से उन्होंने आग्रह किया कि वे गैर उर्दू भाषी पांच लोगों को उर्दू सिखाने का संकल्प लें।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉक्टर हाफिज अब्दुल मन्नान तर्जी साहेब ने उर्दू साहित्य की विशेषताओं से उपस्थित लोगों को अवगत कराया। इस अवसर पर उनकी रचना ‘तौसीही नज्में’ का लोकार्पण भी हुआ।

कार्यक्रम में डॉ शाकिर खलीक, डॉक्टर खालिद सज्जाद, डॉ आफताब अशरफ, फ़िरदौस अली, डॉ अकील सिद्धकी, डॉ एहतेशाम उल हक, जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी राजीव रंजन प्रभाकर ने भी अपने व्याख्यान दिए। इस अवसर पर बच्चों के बीच उर्दू भाषा से संबंधित प्रतियोगिता भी आयोजित हुई जिसमें बच्चों ने अपने प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

फरोग ए उर्दू कार्यक्रम के दूसरे सत्र में जिला के प्रसिद्ध शायरों का मुशायरा भी हुआ जिसमें लोगों ने एक से बढ़कर एक गजल और गीत एवं शेर प्रस्तुत किए कार्यक्रम में डीपीआरओ लाल बाबू सिंह, शायर नूर मोहम्मद अजीज, खुर्शीद आलम, मुश्ताक इकबाल, मुनव्वर राही ,इनामुल हक बेदार ,अब्दुल कयूम, ऐमल हाशमी मायल, इरफान अहमद पैदल, हसीन मंजर , शबीना नौशाद, जुनैद आलम आरवी सहित काफी संख्या में साहित्य प्रेमी एवं स्कूली बच्चे भी उपस्थित थे।

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