
बिहार में ग्रामीण एवं स्वास्थ्य पर्यटन की असीम संभावनाएं: प्रो0 परबतियार। Voice of Darbhanga

07.12.2018
दरभंगा: सर्वाधिक प्रचलित धर्म में से चार हिन्दू, बौद्ध, जैन एवं सिख के आधार बिहार से जुड़े हैं। बिहार का ऐतिहासिक महत्व रहा है। यहां ग्रामीण पर्यटन के साथ ही स्वास्थ्य पर्यटन की पर्याप्त संभावनाएं हैं। लनामिविवि के पीजी कॉमर्स व एमबीए विभाग की ओर आयोजित दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार में टेक्सास विश्वविद्यालय अमेरिका के प्रो. अतुल परबतियार ने यह बातें कही। उन्होंने पर्यटन के क्षेत्र में उपलब्ध संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए क्षेत्रीय परिवेश में बिहार में पर्यटन के पर्याप्त पोषण के लिए ब्रांड बिहार को विकसित करने की आवश्यकता जताई। उन्होंने पर्यटन के विकास के लिए शिक्षा एवं आधारभूत संरचना पर ध्यान देने को आवश्यक बताया। जम्मू विश्वविद्यालय के प्रो. पीएस मन्हास ने कहा कि पर्यटन के विकास को पर्यटकों से जोड़ना जरूरी है। अगर पर्यटकों का अनुभव अच्छा रहेगा तो इसका सकारात्मक प्रभाव अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। बिहार जैसे कृषि प्रधान राज्य में कृषि पर्यटन की व्यापक संभावनाएं है। इसका दोहन किया जाना चाहिए। हेमवती नंदन बहुगुणा विश्वविद्यालय उत्तराखंड के प्रो. एसके गुप्ता ने बिहार में शैक्षिक पर्यटन के अतीत, वर्तमान और भविष्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने राज्य में विरासत में प्राप्त ऐतिहासिक स्थलों के व्यापक प्रचार-प्रसार की आवश्यकता जताई। केंद्रीय विश्वविद्यालय गया के उपकुलपति प्रो. ओपी राय ने सेवा क्षेत्र से जुड़े पर्यटन को विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने इसके लिए कानून एवं व्यवस्था की अच्छी स्थिति बनाए रखने की अहमियत जताई। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रतिकुलपति प्रो. जय गोपाल ने पर्यटन के विकास पर बल देते हुए कहा कि इससे सांस्कृतिक विकास को भी गति मिलती है व अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होती है। धन्यवाद ज्ञापन वाणिज्य संकायाध्यक्ष प्रो. अजीत कुमार सिंह ने की। इससे पूर्व आयोजन सचिव प्रो. एचके सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया जबकि प्रो. बीबीएल दास ने विषय प्रवर्तन किया। संचालन डॉ. दिवाकर झा ने किया। दो तकनीकी सत्र हुए जिसकी अध्यक्षता प्रो. एसके गुप्ता एवं प्रो. पीएस मन्हास ने की। इन सत्रों में दिल्ली के आदिति लहरी व भूटान के हितनाथ ढकाल ने मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार रखे। इस अवसर पर विभाग की स्मारिका का विमोचन भी किया गया।

