
खबर का असर: विधायक की पहल से वर्षों बाद झझरी सिरुआ सड़क के जीर्णोद्धार की जगी आस।
दरभंगा। मोहन चन्द्रवंशी
बहेड़ी प्रखंड अंतर्गत वर्षो से बदहाली का दंश झेल रहे झझरी-सिरुआ सड़क के मुद्दे को वॉयस ऑफ दरभंगा द्वारा उठाये जाने के बाद इसपर स्थानीय विधायक के संज्ञान से इसके जीर्णोद्धार की उम्मीद एकबार फिर जगी है। दरअसल गत 12 दिसम्बर को मुख्यमंत्री जल जीवन हरियाली अभियान के दौरान समीक्षा बैठक कर रहे थे, जिसमे हायाघाट के विधायक अमरनाथ गामी ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। मुद्दे पर लिखित पत्र के साथ उन्होंने इसे बैठक के प्रोसिडिंग में नोट करवाया।
विधायक द्वारा पत्रांक-AH/193/19 दिनांक 12-12-2019 के माध्यम से दिये पत्र के अनुसार उन्होंने बताया है कि वर्षो से जर्जर सड़क के निर्माण का कार्य वर्ष 2007 में झझरी चौक-चक्का-सिरुआ होते हुए भच्छी उज्जैना तक निर्माण केलिए पथ निर्माण विभाग को हस्तांतरित किया गया। परंतु ठेकेदार द्वारा आधा अधूरा कार्य करके छोड़ दिया गया था। इस कारण लोग वर्षो से जलजमाव झेलने एवं जर्जर सड़क पर चलने को मजबूर हैं।
बता दें कि राज्य का विकास तेजी से हो रहा है, इसमें कोई संदेह नहीं, लेकिन कई गांवों की टूटी फूटी सड़कें और बहता गंदा पानी यही कह रहा है कि वहां पर कोई विकास या सुधार हुआ ही नहीं। यही स्थिति बहेड़ी प्रखंड के झझरी चौक सिरुआ गाँव की है। जोरजा पंचायत के नवटोल, निमैठी पंचायत के चक्का गांव, बलिगांव पंचायत के सिरुआ, बिहरौना के साथ साथ दर्जनों गांव की सड़क बदहाली झेल रहा है। इन क्षेत्रों में सड़क की विकास के नाम पर इसकी स्थिति शून्य है। गांव के लोग कोई काम न बता दें इसलिए एमएलए, एमपी या फिर सत्ताधारी बड़े नेता हो या सरकारी बाबू यहां के लोगों से दूरी रखते हैं, तथा आना जाना तो दूर, इन क्षेत्र के लोगो से दूरी ही बना कर रखते है। वे पंचायत के अधिकतर काम ठेकेदारी प्रथा पर करवाते हैं परन्तु उस काम को देखने नही जाते है।
झझरी चौक सिरुआ होते हुए बिहरौना, उज्जैना, बलिगांव की मुख्य सड़क वर्षों पुरानी व बेहद जर्जर स्थिति में है। पूरे वर्ष भर इस सड़क पर चलना तक दुश्वार होता है। सड़क नाली के अभाव में गली पर गंदा पानी स्वच्छता और गांव के विकास की पोल खोल रहा है। ऐसी परेशानी अक्सर लोंगो को होती रहती है। प्राइवेट वाहनों के अलावा कई स्कूलों की गाडिय़ां भी रोज इस सड़क पर आती जाती
हैं। उखड़ी हुई गड्ढे के कारण जो परेशानी आम लोगों और स्कूली बच्चों को होती है, उसका वर्णन करना भी कठिन है। गांव के लोग सड़क की मरम्मत के लिए विधायक से लेकर सांसद के पास लोग दौड़ लगाए लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला। यहां पानी निकासी का भी कोई इंतजाम नहीं है। गांव और उसके आसपास बनी कुछ सड़कों में पानी निकासी का कोई भी समुचित प्रबंध नहीं हैं। कई जगहों पर जिस नाली से पानी बह रहा था, वहां पर सड़क बनते बनते रह गई। एक तरफ नाला न होने से पानी निकासी की समस्या गहरा गई है। घरों से निकलने वाला पानी गड्ढे में एकत्रित हो जाता है।
कई गलियों में भरे गंदे पानी से खतरनाक मच्छर बढऩे से मलेरिया और डेंगू का खतरा भी बना रहता है। लोगों ने कई बार प्रशासन से मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने की मांग की, लेकिन आज तक समस्या का समुचित समाधान नहीं हुआ। इस क्षेत्र में कूड़ा कचरा फेंकना भी एक बड़ी समस्या है। न तो कहीं कचरा फेंकने की कोई जगह है और न ही कूड़ा कचरा उठा कर ले जाने की कोई शासकीय व्यवस्था है। कई जगहों पर लगे कचरे कूड़े के ढेर संक्रामक बीमारियों को आमंत्रण दे रहे हैं। मजबूरी में गांव में लोग घर से निकलने वाले कचरे के ढेर से कागज व प्लास्टिक आदि अलग कर जला देते हैं।
आने वाले समय में विधानसभा एवं ग्राम पंचायतों के चुनाव होना है। मतदाताओं के लिए फिर वही यह प्रश्न वोट किसे दें और क्यों दें! लोग चुनाव में वोट देते किसलिए हैं! क्षेत्र के विकास के लिए तो फिर क्षेत्र का विकास तो होना चाहिए, नहीं तो हमारे वोट देने से फायदा क्या है। अब तक तो यही होता आया है जिसका खमियाजा बरसों से ग्रामवासी भुगत रहे हैं।
अब देखने वाली बात होगी कि सरकार इस पत्र पर ध्यान देती है और इस क्षेत्र के लोगो चकाचक सड़क मिलता है या फिर ठंढे बस्ते में डालकर इस क्षेत्रो के लोगो को दुर्दशा भुगतने केलिए ही छोड़ दिया जाता है।

