
झोरा जागरूकता अभियान द्वारा पर्यावरण संरक्षण के साथ स्वरोजगार केलिए महिलाओं की अद्भुत पहल।
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दरभंगा: राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी ने कहा था कि हम नदियों को साफ रखकर कर हम अपनी सभ्यता को जिंदा रख सकते हैं। परन्तु न नदियां साफ बची न सभ्यता। सब मे पॉलीथिन की मिलावट हो गयी और नदियों, तालाबों, पोखरों सबके अस्तित्व पर खतरा उतपन्न हो गया है। यदि हमने पॉलीथिन को अपने जीवन से नही निकाला तो जीवन हमारे हाथ से निकल जायेगा।
इसी को देखते हुए लगभग 25 हजार महिलाओ के विश्वस्तरीय ऑनलाइन ग्रुप सखी बहीनपा मिथिलानी समूह की महिलाओं ने महात्मा गांधी के जन्मदिवस दो अक्टूबर से पॉलीथिन के उपयोग के खिलाफ एक बड़ा अभियान छेड़ रखा है।
शुक्रवार को इसी क्रम में लहेरियासराय के बलभद्रपुर में
इस समूह की महिलाओं द्वारा झोरा जागरूकता अभियान का आयोजन किया गया। इस दौरान लोगो को पॉलीथिन का उपयोग बन्द करके मिथिला पेंटिंग से बने झोला का उपयोग करने केलिए जागरूक किया गया। आरती झा द्वारा संचालित इस ग्रुप की सक्रिय सदस्या नेहा पुष्प की सोच ने पर्यावरण को बचाने के साथ साथ मिथिला पेंटिंग से जुड़े कलाकारों को स्वरोजगार का बढ़िया अवसर उपलब्ध करवाया है।
शुक्रवार को आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत प्रसिद्ध मैथिली गीत जय जय भैरवी से हुई। इस दौरान मिथिला पेंटिंग से बने रंग बिरंगे झोलों के स्टाल के साथ साथ महिलाओ के द्वारा स्वयं से बनाये गए दही-बड़ा, बेसन के लड्डू, आचार, नमकीन आदि सहित खाद्य पदार्थों का भी स्टाल लगाया गया था। विभिन्न प्रकार के 50 रुपये से लेकर 250 रुपये तक अलग अलग मूल्य के झोले भी जहां लोग उत्साह के साथ खरीदारी करते नजर आए, वहीं स्वादिष्ट खाद्य पदार्थों का भी लुफ्त उठाते नजर आए।
इस दौरान गीत संगीत के साथ विभिन्न प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रमो की भी आकर्षक प्रस्तुति की गयी।
बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे मैथिली फ़िल्म लव यू दुल्हिन के अभिनेता विकास झा ने भी इस पहल की जमकर तारीफ की तथा हर जगह इस झोले को अपने कार्यक्रमो में प्रमोट करने का वादा किया।
झोले की खरीदारी करते हुए कृष्णकांत चौधरी ने जहां महिलाओ के पहल को पर्यावरण बचाने केलिए बड़ा प्रयास बताया, वहीं मणिभूषण राजू ने स्वादिष्ट खाद्य पदार्थों का लुफ्त उठाते हुए कहा कि कितने भी वैसे ख़र्च हो जाएं, पर घर के जैसा स्वाद बाजार में नही मिलता।
मौके पर वॉयस ऑफ दरभंगा के संपादक अभिषेक कुमार को महिलाओ ने झोला प्रदान करते हुए लोगो को जागरूक करने की अपील की। अभिषेक कुमार ने इस पहल की प्रशंसा करते हुए कहा कि लोग कहते हैं कि महिलाएं पुरुषों से कम नही, परंतु सच तो ये है कि इस प्रयास से महिलाओ ने पुरुषों को कहीं पीछे छोड़ दिया है। अब पर्यावरण संरक्षण संग स्वरोजगार उपलब्ध करवाने में पुरुषों को सोचना पड़ेगा कि वे महिलाओं की बराबरी कैसे करें।
कार्यक्रम दिन के 11 बजे से शाम चार बजे तक चला। सखी बहीनपा समूह की महिलाओं ने समाप्ति के दौरान एक दूसरे को गुलाल लगाकर होली मिलन का भी माहौल उतपन्न कर दिया।

